दान की महिमा
   Date09-May-2022

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प्रेरणादीप
ऋ षि सुदीर्घ अपने आरण्यक में शिष्यों के साथ बैठे थे। शिष्यों ने प्रश्न किया-'गुरुदेव! लगभग सभी नदियां पूजित हैं, पर सागरों को ऐसा सम्मान मिलता दिखाई नहीं पड़ता, ऐसा क्यों? 'ऋषि सुदीर्घ ने उत्तर दिया-'प्रेम और सम्मान उन्हें मिलता है, जो वितरण करते हैं, संग्रह नहीं। नदी सब कुछ खोते हुए भी बहती जाती है; जबकि सागर आप्लावित होते रहते हैं। जो देते हैं, वे ही पाते हैं।Ó शिष्यों को दान की महिमा ज्ञात हो गई।