राष्ट्रीय शिक्षा नीति का शिक्षक ही करेंगे 80 प्रतिशत क्रियान्वयन
   Date08-May-2022

ws4
ठ्ठअजय जैन 'विकल्पÓ
इंदौर ठ्ठ राष्ट्रीय शिक्षा नीति का 80 प्रतिशत क्रियान्वयन शिक्षक ही करेंगे। सबका आपसी समन्वय होगा तो भाषा की तरफ सबको जोडऩे का प्रयास पूरा हो सकेगा। यह नीति बहुत बेहतरीन है तथा प्रधानमंत्री सहित सभी ने निष्पक्षता रखी है।
विशेष चर्चा में यह जानकारी नई दिल्ली स्थित संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन (अकादमिक) के निदेशक प्रो. चांद किरण सलूजा ने दी। इंदौर में देअविवि में राष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर वक्ता आए प्रो. सलूजा ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लंबे समय बाद लागू की गई है, इसके लिए सबने बहुत मेहनत की है। अब यह अंतिम स्तर में है। इसके लिए गठित 35 समूहों ने काम किया है। अब 15 मई को एक ड्रॉफ्ट सौंपा जाना है। आपने विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी दी तथा बताया कि एनसीईआरटी को क्रियान्वयन कराना है, लेकिन शिक्षक समझ नहीं रहे हैं कि सब कुछ उन्हें ही करना है। आपके अनुसार सरकार एवं समितियों ने नीति तैयार की है, पर जमीनी क्रियान्वयन शिक्षक ही करेंगे, उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
संकुल बनाएं-आपने बताया कि विद्यालयों का संकुल बनाना होगा, ताकि उनकी सुविधाओं की साझेदारी एवं एकता हो सके। इसमें प्रधानाचार्यों को भी जुडऩा होगा। यह भी बताया कि 4 वर्षीय बी.एड. करने का उद्देश्य सारे शिक्षकों को समानता देनी है। इनको 'डाईटÓ आदि से जोड़कर भूमिका देनी होगी, तभी 10 वर्ष में यह नीति क्रियान्वित होगी। 2030 तक इसका असर दिखेगा।
419 पृष्ठ पढऩे होंगे-प्रो. सलूजा ने इस बात को स्पष्ट किया कि नीति में कोई कमी नहीं है, पर सबकी अपनी सीमाएं हैं। इसको समझने के लिए 419 पृष्ठ पढऩे होंगे, जब यह हो जाएगा तो शिक्षक स्वयं समझ जाएंगे।