परिसीमन से खुली राह...
   Date07-May-2022

vishesh lekh
लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह महत्वपूर्ण बिंदु रहता है कि किसी भी निकाय या तंत्र से जुड़े चुनाव समय पर और निष्पक्ष रूप से पारदर्शी भूमिका के साथ हों...इसके द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि और बनने वाली सरकार वास्तव में उन सभी व्यवस्थाओं को मूर्तरूप देती है, जो संवैधानिक दृष्टि से अपरिहार्य हैं एवं लोकतंत्र के लिए आवश्यक भी हैं...5 अगस्त 2019 को भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर को उन बेजा प्रावधानों से मुक्ति मिली थी, इस कारण वह दशकों से हिंसा व आतंकवाद की आग में तिल-तिल जलता रहा है...लेकिन वास्तव में लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू करने के लिए चुनी हुई सरकार की आवश्यकता होती है...अब जब जम्मू-कश्मीर अनुच्छेद 370, 35 ए से मुक्त होकर तीन भागों में विभक्त हो चुका है, तब इस बात की भी हर किसी को बेसब्री से प्रतीक्षा थी कि कब राज्य में परिसीमन होगा और चुनाव की राह खुलेगी..? अब जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है...वह भी अपना कार्यकाल खत्म होने के एक दिन पहले...इस परिसीमन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल जनता के प्रतिनिधित्व के मान से ही संतुलन नहीं साधती..,बल्कि लोगों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में समान रूप से भागीदार बनाने के लिए उन्हें वोट का अधिकार देकर जनप्रतिनिधि बनने का भी मार्ग प्रशस्त करती है...इससे यह लाभ होगा कि जम्मू-कश्मीर में अब तक जिस अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग को नेतृत्व के मान से या जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव लडऩे का अवसर नहीं मिला था, उन्हें भी परिसीमन आयोग ने दायरे में लिया है..,क्योंकि 1995 में जम्मू-कश्मीर में परिसीमन हुआ था, तब से घाटी के लोग भी सरकार बनाने-बिगाडऩे में अहम भूमिका निभाते रहे...यानी जम्मू-कश्मीर व लद्दाख क्षेत्र के लोगों के निर्णायक वोट का कभी भी कोई महत्व नहीं रहा...नए परिसीमन से जम्मू क्षेत्र में 6 तो कश्मीर में 1 सीट बढ़ेगी...इससे भी बढ़कर यह महत्वपूर्ण है कि सभी 5 संसदीय क्षेत्रों में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों की संख्या पहली बार बराबर रखी गई है...यानी अब प्रत्येक लोकसभा सीट में विधानसभा की कुल 18 सीट होगी...यानी 47 सीटें कश्मीर संभाग से तो 43 सीटें जम्मू संभाग से प्रतिनिधित्व करेंगी...अभी तक यह असंतुलन क्रमश: 46 व 37 सीटों का रहा है...इसी को दुरुस्त करते हुए परिसीमन आयोग ने कुल 90 सीटें जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के लिए तय की हैं... अजा वर्ग के लिए 7 सीटें छोडऩा परिसीमन पारदर्शिता का द्योतक है...
दृष्टिकोण
मोटापे पर चिंता बढ़ाती रिपोर्ट...
स्वस्थ तन-मन ही सुखी जीवन का आधार है...यह बात हमने किताबों में ही पढ़ी-सुनी नहीं है..,बल्कि सनातन काल से इसको हमारे धर्मग्रंथ और पर्व-परंपरा रेखांकित भी करते रहे हैं...लेकिन आधुनिक जीवनशैली, खानपान, कार्य करने के बदलते तरीके और आरामतलब जीवनशैली के बावजूद शरीर के साथ ही मन-मस्तिष्क को तनाव देने की पराकाष्ठा पार करने का नतीजा है कि आज मनुष्य को अनेक तरह की व्याधियां घेर रही हैं...विशेष रूप से मधुमेह, कैंसर, डिप्रेशन और मोटापा कुछ ऐसे रोग हैं, जो सामान्य से ही अधिक स्तर पर अपना असर दिखा रहे हैं और इसके शिकंजे में हर आयुवर्ग के लोग आ चुके हैं...मोटापा आज देश-दुनिया के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बन रहा है..,क्योंकि मोटापे से जुड़े खुलासे हर किसी की चिंता को बढ़ा रहे हैं...यूरोप में तो मोटापा महामारी की शक्ल ले चुका है...जबकि अनेक यूरोपीय और अफ्रीकी देशों में तो गरीबी, भुखमरी का आलम है...फिर वहां पर मोटापे का कारण कुपोषण से ज्यादा शारीरिक-मानसिक तनाव सामने आया है...विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) रिपोर्ट के अनुसार मोटापा यूरोपीय देशों में हर साल 12 लाख लोगों की मौत और कैंसर के 2 लाख मामलों का कारण है...यह अध्ययन चिंता की लकीर खींच रहा है..,क्योंकि पहली बार 15 वर्ष के लोगों को दायरे में रखा गया है...59 फीसदी यूरोपीय वयस्कों का वजन सामान्य से अधिक पाया गया है, इसके कारण उन्हें अनेक तरह के रोग अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं...मोटापे के कारण हड्डियों, लिगामेंट और कार्टिलेज संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का ग्राफ भी बढ़ रहा है...यही नहीं, मधुमेह, हृदय रोग और 13 तरह के अन्य कैंसर भी इसी मोटापे के कारण लोगों का जीवन लील रहे हैं...अगर भारत में इस संबंध में बात करें तो 33 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अधिक वजन वाले बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है...भले ही आज मोटापे में इजरायल सबसे आगे हो..,लेकिन भारत में भी मोटापा बड़ी समस्या का रूप ले रहा है...