लाउडस्पीकर से अज़ान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं
   Date07-May-2022

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ का बड़ा फैसला : मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाना मौलिक अधिकार नहीं
प्रयागराज द्य 6 मई (वा)
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मस्जिदों में अजान के वास्ते लाउडस्पीकर लगाने को संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार की श्रेणी में बताने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति विकास की खंडपीठ ने कहा कि मस्जिद में लाउडस्पीकर से अज़ान देना संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार की श्रेणी में नहीं आता है। अदालत ने कहा कि अज़ान, इस्लाम का अभिन्न अंग तो है, लेकिन लाउडस्पीकर से अज़ान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं है। याचिकाकर्ता इरफान ने बदायूं के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के गत वर्ष तीन दिसंबर को पारित उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने जिले के धोरनपुर गांव में स्थित नूरी मस्जिद में अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति नहीं दी। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि एसडीएम के आदेश से उसके मौलिक अधिकारों का हनन होता है, इसलिए यह आदेश अवैध है।
क्या है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस - सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का प्रयोग ना किया जाए। हालांकि, ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस हॉल, कम्युनिटी और बैंक्वेट हॉल जैसे बंद स्थानों पर इसे बजा सकते है । लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर संविधान में नॉयज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000 में प्रावधान है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर कैद और जुर्माने दोनों सजा का प्रावधान है। इसके लिए एन्वार्यमेंट (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1986 में प्रावधान है. इसके तहत इन नियमों का उल्लंघन करने पर 5 साल कैद और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
राज्य सरकारें दे सकती हैं रियायत-राज्य सरकार चाहे तो कुछ मौकों पर रियायतें दे सकती है। राज्य सरकार किसी संगठन या धार्मिक कार्यक्रम के लिए लाउडस्पीकर या दूसरे यंत्रों को बजाने की अनुमति रात 10 बजे से बढ़ाकर 12 बजे तक कर सकती है। हालांकि, एक साल में सिर्फ 15 दिन ही ऐसी अनुमति दी जा सकती है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में 54 हजार से ज्यादा मस्जिदों से लाउडस्पीकर को हटा लिया गया है और 60 हजार लाउडस्पीकर की आवाज कम कर दी गई है।