दुनिया की एक ही मंजिल होगी 'चलो इंडिया'
   Date04-May-2022

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यूरोप यात्रा : डेनमार्क के बेल्ला सेंटर में भारतीय समुदायों के बीच बोले प्रधानमंत्री मोदी
कोपेनहेगन द्य 3 मई (वा)
तीन दिवसीय की यूरोप यात्रा के दूसरे दिन मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डेनमार्क पहुंचे। डेनमार्क की पीएम फ्रेडरिक्सन ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने भारत-डेनमार्क के टॉप बिजनेस लीडर्स से मुलाकात की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित करने बेल्ला सेंटर पहुंचे। यहां उन्होंने सभी भारतीयों का आभार व्यक्त किया और लोगों को चलो इंडिया का नारा भी दिया और कहा कि पूरी दुनिया के लिए भविष्य में भारत ही अंतिम मंजिल (डेस्टिनेशन) है । उन्होंने कहा कि दुनिया में रह रहा हर भारतवासी अगर 5 गैरभारतीयों को घूमने के लिए भारत भेजने का काम करेगा तो भारत दुनिया का सबसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन बन जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- हमारा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। अगर आप मानने वाले हैं तो मैं बताऊं। लोगों की खामोशी पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा- आप लोगों को देखकर ऐसा लग रहा है कि पक्का कोई मुसीबत आ रही है। मैं दुनिया में जितने भी देश वासी रह रहे हैं उनसे एक आग्रह करता हूं, आप हर वर्ष 5 गैर भारतीय फ्रेंड्स को भारत देखने के लिए भेजने का काम कर सकते हंै। अभी से लक्ष्य कीजिए। आप उन्हें बताएं कि हमारे यहां ये है। इससे हम ताकत बन सकते हैं। चुटीले अंदाज में उन्होंने कहा कि ऐसा मत कहना कि वहां डायरेक्ट फ्लाइट नहीं है। हमें फिर से वातावरण बनाना है। दुनिया के लिए एक ही डेस्टिनेशन बन जाएगा इंडिया। ये काम राजदूतों का नहीं, आप जैसे राष्ट्रदूतों का है। आप ये करेंगे।
हमने दुनिया को सस्ती वैक्सीन दी-कल्पना कीजिए कि अगर भारत में हम वैक्सीनेशन को हर परिवार तक नहीं पहुंचा पाते तो उसका दुनिया पर क्या असर होता? अगर भारत मेड इन इंडिया, सस्ती और प्रभावी वैक्सीन्स पर काम ना करता, बड़े स्केल पर प्रोडक्शन ना करता तो दुनिया के अनेक देशों की क्या स्थिति होती?
आज भारत जो कुछ भी हासिल कर रहा है, वो उपलब्धि सिर्फ भारत की नहीं है, बल्कि वो करीब वन-फिफ्थ ह्यूमेनिटी की उपलब्धि है।
डेनमार्क भारत के उपनिषद के करीब
डेनमार्क ग्रीन फ्यूचर में हमारा मजबूत साझेदार बन रहा है। हमारे बीच ग्रीन शिपिंग,साइंस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में साझेदारी है। हाइड्रोकार्बन पर किसानों की निर्भरता कम कर रहा है। डेनमार्क की कंपनियों के पास इसकी क्षमता है। आप अपने डेनमार्क के साथियों को इसके बारे में जरूर बताएं। कोपनहेगन यूनिवर्सिटी में नीलबोर का नाम है। वे खुद की जरूरत के समय भारत के उपनिषद के पास जाते थे। आज नम्रतापूर्वक अपने डेनिस मित्रों से कहना चाहता हूं कि आप अपनी समस्याओं के लिए भारत आएं।
भारतीयों की दुनिया करती है तारीफ
प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक भारतीय दुनिया में कहीं भी जाए, वो अपनी कर्मभूमि और उस देश के लिए पूरी ईमानदारी से कंट्रीब्यूट करता है। अनेक बार जब मेरी विश्व नेताओं से मुलाकात होती है तो वे अपने देशों में बसे भारतीय समुदाय की उपलब्धियों के बारे में मुझे गर्व से बताते हैं।
भारत के डेनमार्क से संबंध बेहद मजबूत
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के कारण बहुत समय तक सभी की जिंदगी एक तरह से वर्चुअल मोड में ही चल रही थी। पिछले साल जैसे ही आवाजाही मुमकिन हुई तो प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन पहली राष्ट्राध्यक्ष थीं जिनका हमें भारत में स्वागत करने का अवसर मिला। ये भारत और डेनमार्क के मजबूत होते संबंधों को दिखाता है। हमारी ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं, उनके जीवन मूल्यों से काम करने में भरोसा रखती हैं। आज उनके साथ मेरी जो चर्चा हुई है, उससे दोनों देशों के संबंधों को नई ताकत मिलेगी, नई ऊर्जा मिलेगी।
भारत में निवेश करने का सही समय
इंडिया-डेनमार्क बिजनेस फोरम में मोदी ने कहा- इन दिनों सोशल मीडिया पर एक शब्द बड़ा लोकप्रिय हो रहा है। ये है-एफओएमओ यानी फियर ऑफ मिसिंग आउट। आज अगर हम भारत के व्यापार सुधारों और निवेश के मौकों को देखें, तो ये कहा जा सकता है कि जो आज भारत में निवेश नहीं करेगा, वह निश्चित तौर पर एक अच्छा मौका मिस कर देगा।