खालिस्तानी आतंक की आहट..!
   Date11-May-2022

vishesh lekh
एक तरफ सीमा पर पाकिस्तान से आएदिन भारत को आतंकवादी व घुसपैठ वाली घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है... जम्मू-कश्मीर से लेकर अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में जिस तरह से कभी सुरंग, तो कभी गोला-बारूद के साथ ही घुसपैठ संबंधी साक्ष्य मिल रहे हैं, यह सारी बातें देश की सुरक्षा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है... लेकिन इस सुरक्षा चुनौती में किसी दाद में खाज का काम आजकल पाकिस्तान में चल रही दहशतगर्दी वाली घटनाएं संकेत कर रही हैं कि क्या पाकिस्तान शनै: शनै: आतंकवादी शिकंजे में फंसता जा रहा है... क्योंकि जिस तेजी से कभी आरडीएक्स तो कभी खालिस्तानी आतंकियों के सबूत मिल रहे हैं, यह अपने आप में न केवल पंजाब की, बल्कि देश की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ाने का कारण माना जाना चाहिए.... पंजाब के मोहाली में सोमवार शाम को आतंकी हमले से एक बार फिर यह मामला सामने आ गया है कि क्या पंजाब में सरकार बदलने के साथ ही खालिस्तानी समर्थक धड़ों के मन की होने लगी है..? क्योंकि इंटेलीजेंस हेड क्वार्टर पर आतंकियों ने न केवल राकेट लांचर से हमला किया, बल्कि पूरी इमारत को बड़ा नुकसान पहुंचाने में भी सफल हुए हैं... हमला हेड क्वार्टर से महज 80 मीटर की दूरी पर किया गया... इससे इस बात की भनक लगती है कि आतंकियों के प्रश्रयदाता जम्मू-कश्मीर की भांति पंजाब में भी कहां-कहां छिपे बैठे हैं... दूसरी तरफ इस तरफ गौर फरमाना चाहिए कि गत दिनों हिमाचलप्रदेश के धर्मशाला में विधानसभा के मुख्य द्वार पर खालिस्तानी झंडे लटकाए गए थे... यही नहीं, दीवार पर आपत्तिजनक नारे भी लिखे गए थे, पुलिस ने इस मामले में अपनी प्राथमिक जांच प्रारंभ कर दी है... प्राथमिकी में गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा जोड़ी गई है और इसमें अलगाववादी गुरपतवंत पन्नु को मुख्य आरोपी बनाया गया है... पंजाब से लगे हुए हिमाचल और हरियाणा में इस तरह की आतंकी और अलगाववादी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं... इस बात का संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं देश की शांति व्यवस्था को भंग करने वाले अराजक और दहशतगर्द मंसूबों को देश में ही बैठे राष्ट्रघाती तत्वों से खाद-पानी मिल रहा है... क्योंकि जब इस तरह की हरकतें आएदिन होने लगे, तो इस बात पर विचार करना जरूरी हो जाता है कि आखिर इनका असल मकसद क्या है..? क्योंकि इस मोहाली आतंकी घटनाक्रम की केन्द्र सरकार व्यापक जांच करवाकर इसकी जड़ में छुपे राष्ट्रघाती तत्वों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की पहल करे, वरना पंजाब का शनै: शनै: हिंसा की आग में जाना तय है...
दृष्टिकोण
ओबीसी आरक्षण अधर में...
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को पंचायत व निकाय चुनाव में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले, इसी बात को लेकर पंचायत व निकाय चुनाव टलते रहे हैं... कांग्रेस की कमल नाथ सरकार ने उस समय इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया और बाद में गेंद भाजपा की शिवराज सरकार के पाले में आ गई... आनन-फानन में चुनाव आचार संहिता का बिगुल बजा ही था कि कांग्रेस ने कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया... क्योंकि जब सत्ता में रहते कांग्रेस को ओबीसी के आरक्षण व प्रतिनिधित्व की चिंता नहीं रही, तो उसे सत्ता जाते ही ओबीसी के वोटबैंक का ध्यान आ गया... लेकिन इस मामले में वर्तमान की शिवराज सरकार भी कोई त्वरित पहल या सार्थक कदम उठाने में मानो विफल ही रही है, तभी तो पंचायत व निकाय चुनाव इतने लंबे समय तक टलने के बावजूद ओबीसी से जुड़ा आरक्षण संबंधी मामला फिलहाल अधर में ही लटका हुआ है... क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्णय सुनाया है, वह यही है कि बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत व निकाय चुनाव करवाने होंगे... इसके लिए दो सप्ताह में चुनाव की अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए गए हैं... कुल मिलाकर कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में एससी/एसटी आरक्षण के आधार पर ही चुनाव होंगे... लेकिन ओबीसी आरक्षण को शामिल नहीं किया जाएगा... राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश में 48 फीसदी ओबीसी आबादी का हवाला देते हुए 34 फीसदी आरक्षण की मांग की थी... लेकिन अदालत के अनुसार आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकता... इसी संबंध में राज्य सरकार से मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध न होने के कारण कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया... हालांकि मप्र की शिवराज सरकार पुन: पुनर्विचार याचिका लगाकर ओबीसी आरक्षण पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए उनके पर्याप्त प्रतिनिधित्व की बात कर रही है, लेकिन अब इस दिशा में सबकुछ सरकार की मंशानुरूप होगा, ऐसा लगता नहीं... क्योंकि चुनाव हुए 5 के बजाय 8 साल से अधिक हो गए हैं... जो कि लोकतंत्र सम्मत नहीं है...