अंतप्रेरणा
   Date29-Apr-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
रा जा ऋषभदेव के सौ पुत्र थे और उन्होंने अपने जीवन में यह व्यवस्था की थी कि उनके ज्येष्ठ पुत्र भरत को राजगद्दी दी जाए और शेष 99 पुत्र संन्यासी हो जाएं। पिता की आज्ञा शिरोधार्य कर 98 पुत्रों ने संन्यास ले लिया, पर उनमें से बाहुबली नामक एक पुत्र ने कहा कि राजपद का आधार योग्यता होना चाहिए, मात्र अग्रज होना नहीं। उसने भरत को राजपद हेतु अपनी योग्यता का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा। फलस्वरूप विभिन्न प्रतियोगिताओं का दौर चल पड़ा। राजनीति, धर्म, अर्थ और शस्त्र ज्ञान की प्रतियोगिताएं हुईं। भरत अग्रज होने पर भी पराजित हुआ तो राजसंसद ने बाहुबली को सिंहासन देने का निर्णय किया। भरत को यह सहन नहीं हुआ। राज्य के लोभ में उसने बाहुबली पर प्राणघातक प्रहार कर दिया। बाहुबली ने उसके प्रहार को निष्फल कर दिया और प्रतिक्रियास्वरूप भाई भरत के प्राण लेने को उद्यत हुआ कि तभी उसके अंतर्मन से पुकार निकली-भाई का वध करके जो सिंहासन मिले, उसका क्या मूल्य? अंतप्रेरणा से अभिभूत होकर बाहुबली तुरंत राजपद त्यागकर तपस्या हेतु निकल पड़ा और जनकल्याण के लिए जिए गए अपने जीवन से सदा के लिए अमर हो गया।