बाजीराव के गौरवशाली इतिहास से युवा प्रेरणा लें- देशपांडे
   Date29-Apr-2022

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बाजीराव पेशवा की पुण्यतिथि पर समाधि स्थल रावेरखेड़ी में समारोह संपन्न
खरगोन ठ्ठ स्वदेश समाचार
मराठा सम्राट बाजीराव पेशवा (प्रथम) की पुण्यतिथि गुरुवार को समाधि स्थल रावेरखेड़ी में समारोहपूर्वक मनाई गई।
श्रीमंत बाजीराव पेशवा (प्रथम) स्मृति प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता हिन्दू परिषद के संगठन महामंत्री विनायकराव देशपांडे ने कहा कि बाजीराव का इतिहास गौरवशाली है, उनसे युवाओं को प्रेरणा लेना चाहिए। उन्हें अपना प्रेरणास्त्रोत मानकर उनके आदर्शों पर चलना चाहिए, जिससे देश, समाज और धर्म की रक्षा हो सकेगी। उन्होंने कहा कि बाल्यकाल से ही बाजीराव को घुड़सवारी, तीरंदाजी, तलवार, भाला, बनेठी, लाठी आदि चलाने का बहुत शौक था। एक दिन अचानक बाजीराव के पिता का निधन हो गया, तो वह मात्र 20 वर्ष की उम्र में छत्रपति शाहूजी महाराज के पेशवा बना दिए गए। इतिहास के अनुसार बाजीराव घुड़सवारी करते हुए लडऩे में सबसे माहिर थे  और यह माना जाता है कि उनसे अच्छा घुड़सवार सैनिक भारत में आज तक कभी नहीं देखा गया। पूरी सेना को वो हमेशा बेहद सख्त अनुशासन में रखते थे। अपनी बेहतरीन भाषण शैली से वो सेना में एक नया जोश भर देते थे। यही वजह है कि बाजीराव ने अपनी 40 साल की उम्र में कई लड़ाई लड़ी, लेकिन एक भी लड़ाई में पराजय नहीं हुए। उनका उद्देश्य यही था कि पेड़ की जड़ पर वार करो, पेड़ अपने आप कमजोर हो जाएगा। देशपांडे ने कहा कि आज भी ब्रिटिश शासन में बाजीराव पेशवा के शौर्य, पराक्रम, युद्ध नीति को किताबों में शामिल कर पढ़ाया जाता है।