84 तालाब बनाए, 2 लाख कंटूर से धरती की कोख भरी
   Date27-Apr-2022

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प्रधानमंत्री द्वारा हलमा परम्परा की प्रशंसा से वनवासियों में हर्ष की लहर
ठ्ठराजेन्द्रसिंह सोनगरा
झाबुआ द्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मन की बात में भील जनजाति और हलमा परम्परा का जिक्र करने से क्षेत्र के जनजाति समुदाय में हर्ष की लहर है। प्रधानमंत्री ने शिवगंगा अभियान के माध्यम से जनजाति समुदाय की पारम्परिक परम्परा हलमा के माध्यम से पहाडिय़ों पर जल संरक्षण के लिए बनाए जाने वाले तालाब व कंटूर (ट्रेंचिंग) और जल संरक्षण के लिए भीलों द्वारा दिए जा रहे योगदान का जिक्र किया। वनवासी अंचल में अभी तक शिवगंगा द्वारा 16000 युवा परमार्थ प्रशिक्षण लेकर युवा जनजाति युवा अपनी प्राचीन हलमा परम्परा को पुनर्जीवित कर रहे हैं। इसके तहत 84 तालाबों का निर्माण कराया गया। अलग-अलग पहाडिय़ों पर 2 लाख कंटूर ट्रेंच बनाए गए, जिससे हर साल तकरीबन 500 करोड़ लीटर पानी धरती में समा रहा है, जिससे क्षेत्र का भूजल स्तर बढऩे लगा है। पर्यावरण संरक्षण के तहत मतानु वन के माध्यम से 150 से अधिक गांवों मेें 1 लाख से अधिक पौधे रोपे जा चुके हैं, जिनका संरक्षण भी ग्रामीण लोगों की मदद से किया जा रहा है। युवाओं को स्वावलम्बी बनाने के लिए 50 से अधिक युवा कलाकार बांस से बने हस्तशिल्प को देश-विदेश तक ऑनलाइन बेच रह हैं। गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों की मदद ली जा रही है और उन्हेें प्रशिक्षित कर गांव की समृद्धि के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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हलमा परम्परा के माध्यम से हर साल झाबुआ, धार, बड़वानी सहित प्रदेश के कई आदिवासी क्षेत्रों में जल संवर्धन और संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से भील समुदाय के लोग अपना योगदान दे रहे हैं। समाज के लोग अब जल की महत्ता समझने लगे हैं, लिहाजा इसके संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से नि:शुल्क श्रमदान कर तालाबों का निर्माण भी कर रहे हैं।