भारत के हजारों वर्ष के अनुभव का आप सब भी लाभ लीजिए
   Date25-Apr-2022

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पेरिस में बाल साहित्य के एक सत्र को डॉ. विकास दवे ने किया संबोधित
पेरिस द्य 24 अप्रैल (ए)
भारत हजारों वर्षों से बच्चों को कथा, कहानी और लोरी प्रभातियों में संस्कार देने का काम करता चला आ रहा है। बच्चों को जीवन मूल्य देना हमारे यहां दादी, नानी और मां के लिए दैनंदिन जीवन का अनिवार्य भाग है।
पेरिस में बाल साहित्य के एक सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. विकास दवे ने कहा यह बात कही। आपने कहा यदि विश्व मानवीय मूल्य पाना चाहता है तो उसे भारतीय परिवार परंपरा और भारतीय बाल संस्कार परंपराओं की ओर आना होगा। हम दोनों बाहें फैलाए वसुधैव कुटुंबकम के मंत्र के साथ आप सबका एक श्रेष्ठ मित्रवत और प्रकृति पर्यावरण के साथ हिल-मिलकर रहने वाली संस्कृति में स्वागत करना चाहते हैं। बाल साहित्य इसका श्रेष्ठतम माध्यम हो सकता है। भारत के हजारों वर्ष के इस अनुभव से आप सब भी लाभ लीजिए। भारत के पास देने को बहुत कुछ है, बस लेने वाले अपना उच्चता बोध छोड़कर मित्रवत आएं, मिलें और इसे पा लें। यह प्रक्रिया अत्यंत आसान है। भारत का गौरवशाली अतीत और वर्तमान हम सबके सामूहिक स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करने में सक्षम है।