सामाजिक न्याय को प्रतिबद्ध केन्द्र
   Date24-Apr-2022

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बिहार में अमित शाह की मौजूदगी में एकसाथ फहराए गए 78 हजार 25 तिरंगे
पटना/ आराद्य 23 अप्रैल (ए)
बिहार ने अमित शाह की मौजूदगी में 78 हजार 25 तिरंगे फहराकर पाकिस्तान का रिकॉर्ड तोड़ दिया। स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव पर भोजपुर के जगदीशपुर में यह रिकॉर्ड बना। इससे पहले ये रिकॉर्ड पाकिस्तान के नाम था। कार्यक्रम में 5 मिनट तक झंडा फहराया गया। उधर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा वीर कुंवर सिंह की गरीबों, किसानों, उत्पीडि़त और समाज के वंचित वर्गों के प्रति प्रतिबद्धता का स्मरण कराते हुए आज कहा कि उनके ही सामाजिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए केंद्र की मोदी सरकार भी सभी वर्गों की देखभाल कर रही है।
अमित शाह ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत माता की जय के जयघोष से की। उन्होंने जगदीशपुर की धरती को युगपुरुषों की धरती बताते हुए कहा- हेलिकॉप्टर से मैंने देखा कि यहां से पांच-पांच किमी तक लोगों के हाथ में तिरंगा है। कार्यक्रम स्थल से ज्यादा लोग रोड पर वंदे मातरम् और भारत माता की जय बोल रहे हैं। वीर कुंवर सिंह को श्रद्धाजंलि देते हुए उन्होंने कहा- इतिहास ने बाबू कुंवर सिंह के साथ अन्याय किया। उनकी वीरता के अनुरूप उन्हें जगह नहीं दी गई। आज बिहार की जनता पलक-पावड़े बिछाकर उनका नाम एक बार फिर से अमर कर रही है। 58 साल से अनेक प्रकार की रैलियों में गया हूं, लेकिन आरा में राष्ट्रभक्ति का ये उफान देखकर नि:शब्द हूं। ऐसा कार्यक्रम जीवन में कभी नहीं देखा।
श्री शाह 1857 की क्रांति के महान योद्धा वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव (विजय समारोह) के उपलक्ष्य में भोजपुर जिले में जगदीशपुर के दुलौर में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी वीरता से कुंवर सिंह ने ब्रिटिश शासन को पहली बार यह अहसास कराया था कि अब भारतीय उन्हें बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हैं और उन्हें देश छोडऩा होगा। उन्होंने कहा कि लोग महान योद्धा के योगदान से अच्छी तरह वाकिफ हैं और नई पीढ़ी को उनके बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। यह विश्वास करना आसान नहीं था कि 80 वर्ष की आयु में वीर कुंवर सिंह में मजबूत ब्रिटिश सेना को हराने की ताकत और साहस था।
गृहमंत्री ने कहा कि देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में जगदीशपुर के जमींदार बाबू कुंवर सिंह समेत अन्य लोगों ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, लेकिन इतिहासकारों ने उन वीर सपूतों को उचित सम्मान नहीं दिया। आज भोजपुर के लोगों ने बाबू कुंवर सिंह के विजयोत्सव के मौके पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर नया इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा- 1857 के विद्रोह को इतिहासकारों ने विफल विद्रोह करार दिया था, जबकि उस समय बाबू कुंवर सिंह, नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई आदि ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी।