सच्चा मनुष्य
   Date29-Dec-2022

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श्रा वस्ती के दो युवकों में बड़ी प्रगाढ़ मैत्री थी, दोनों ही दूसरों की जेब काटने का धंधा करते थे। एक दिन भगवान बुद्ध का एक स्थान पर प्रवचन चल रहा था। अच्छा अवसर जानकर दोनों मित्र वहीं जा पहुंचे। उनमें से एक को भगवान बुद्ध के प्रवचन बहुत अच्छे लगे और वह ध्यानावस्थित होकर उन्हें सुनने लगा । दूसरे ने कई जेबें इस बीच साफ कर लीं। शाम को दोनों घर लौटे। एक के पास धन था, दूसरे के पास सद्विचार। गिरहकट ने व्यंग्य करते हुए कहा- ‘तू बड़ा मूर्ख है रे, जो दूसरों की बातों से प्रभावित हो गया। अब इस पांडित्य का ही भोजन पका और पेटभर।’ अपने पूर्वकृत कर्मों से दु:खी दूसरा गिरहकट तथागत के पास लौटा और उनसे सब हाल कहा। बुद्ध ने समझाया- ‘वत्स! जो अपनी बुराइयों को मानकर उन्हें निकालने का प्रयत्न करता है, वही सच्चा मनुष्य है, पर जो बुराई करता हुआ भी ज्ञानी बनता है, वही मूर्ख है।’