उत्कर्ष का आधार प्रबल इच्छाशक्ति
   Date10-Nov-2022

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जी वन के किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने का एक प्रमुख आधार इच्छाशक्ति है, चाहे खेल का मैदान हो या परीक्षा की तैयारी, खेती-बाड़ी का लंबा इंतजार हो या पर्वत शिखर की कठिन चढ़ाई या जीवन का कोई विषम दौर। जीवन के हर मोड़ पर प्रबल इच्छाशक्ति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अनवरत असफलता मिलने के बाद भी फिर से प्रयास करने का जज्बा इच्छाशक्ति से ही निर्धारित होता है। वास्तव में जीवन में सफलता इच्छाशक्ति के अनुपात में ही मिलती है। आध्यात्मिक जीवन में तो इसका महत्व और भी अधिक हो जाता है। आत्मसुधार या व्यक्तित्व का निर्माण इच्छाशक्ति पर भी निर्भर करता है।
बिना इच्छाशक्ति के सारी योग्यता, अनुकूलता एवं प्रतिभा धरे के धरे रह जाते हैं। जीवन की विफलता और त्रासदी के मूल में दुर्बल इच्छाशक्ति ही कारण होती है। जब हमें यह मालूम हो कि जीवन में सही क्या है और गलत क्या और तब भी हम गलत मार्ग पर जाने के लिए स्वयं को विवश अनुभव करते हैं तो यह इच्छाशक्ति की न्यूनता को इंगित करता है। जीवन की हर नैतिक दुर्बलता एवं पतन पराभव में दुर्बल इच्छाशक्ति ही मुख्य कारण होती है। जीवन में उत्कर्ष के लिए क्या सही मार्ग है यह जानते हुए उस पर आरूढ़ न हो पाना, इच्छाशक्ति के अभाव के कारण होता है।
वास्तव में इच्छाशक्ति हर व्यक्ति में अंतर्निहित होती है, जिसे जगाने एवं विकसित करने की आवश्यकता भर है। आवश्यकता पडऩे पर या किसी दबाव में हमें वहीं कार्य सरलतापूर्वक अंजाम दे जाते हैं, जो सामान्यतया हम टाल रहे होते हैं। यह हमारे भीतर निहित इच्छाशक्ति को दर्शाता है। वास्तव में इच्छाशक्ति का विकास और कुछ नहीं, बल्कि अंतर्निहित शक्ति का जागरण तथा सही दिशा में उसके नियोजन करने की प्रक्रियाभर है।
इच्छाशक्ति हमारे स्व और मन की संयुक्त रचनात्मक और क्रियात्मक शक्ति है, जो हमें निर्धारित कार्य को निष्कर्ष तक पहुंचाने में सहायक बनती है। जो सही है यह हमें उस पर चलने तथा जो गलत है, उससे बचने की शक्ति देती है। कुछ बातों का ध्यान रखते हुए हम अपनी इच्छाशक्ति को और भी ज्यादा प्रबल बना सकते हैं। यह स्पष्ट समझ व धारणा कि इच्छाशक्ति को हम बढ़ा सकते हैं तथा धीरे-धीरे अनवरत प्रयास के साथ हम इसको सशक्त कर सकते हैं, बहुत माने रखीत है।