मोरबी में मौत का मंजर, सबक...
   Date01-Nov-2022

vishesh lekh
गुजरात के मोरबी में रविवार को पूरे भीषण हादसे में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है... क्योंकि झूला पुल गिरने के कारण जो हादसा हुआ है, वह बहुत ही भीषण और हृदयविदारक है... क्योंकि आज भी सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और राहत बचाव दल की टीमें लगातार लोगों की खोजबीन कर रही है... इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह आंकड़ा 200 को भी पार कर जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए... जिस समय पुल की क्षमता 100 लोगों का वजन सहन करने की थी, उस समय पर उस पर 500 से 700 लोग चढ़ेंगे तो स्वाभाविक रूप से उसका टूटना, ध्वस्त होना या भीषण हादसे को स्वयं निमंत्रण देने जैसा है... क्योंकि जब 100 साल से अधिक यह पुल एकल पुल मच्छु नदी पर केबल पुल के रूप में जाना जाता है... तो इसकी मरम्मत का कार्य भी स्वाभाविक रूप से चल ही रहा था... ऐसे में इस पर आवागमन रोकने या दबाव कम करने की प्रशासनिक रूप से पहल क्यों नहीं की गई... हालांकि 7 माह से यह मरम्मत के लिए बंद था... लेकिन गत 20 अक्टूबर को गुजराती नववर्ष पर इसे खोला गया था... लेकिन फिटनेस संबंधी पूरा मौका मुआयना किया गया या नहीं, इसमें अभी भी संदेह है... इस तरह के भीषण हादसे अनेक बार हो चुके हैं, लेकिन इसमें जिस तरह की शासन-प्रशासन के स्तर पर लापरवाही सामने आती है और जांच आयोग बैठाकर जो रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है, उसमें जिम्मेदार लोग तो सवालों के घेरे में रहते ही है, लेकिन भीड़ का एक सामान्य अनुशासन जो हमारे यहां आज तक स्वनियंत्रित होना चाहिए, वह अभी भी दूर की कोड़ी नजर आता है... तभी तो अब रोते-बिलखते हुए अपने पिता को, तो कोई पत्नी को, तो कोई बच्चों और परिजनों को खोज रहा है... यह कितना हृदयविदारक हादसा है कि मोरबी पुल हादसे में भाजपा सांसद मोहनभाई कुंडारिया के 12 रिश्तेदारों की भी मौत हुई है... जिसमें उनकी बहन के जेठ, जीजा, भाई की चार बेटियां, तीन जवाई और पांच बच्चों की मौत भी शामिल है... प्रधानमंत्री ने अपने गुजरात प्रवास के दूसरे दिन सरदार पटेल को श्रद्धाजंलि अर्पित करने के अवसर पर उन्होंने मोरबी हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके परिवारों को ढांढस बंधाया... यह पुल अपने आप में एक ऐसा भीषण हादसा है, जिसमें मौत का मंजर हमें कड़े सबक लेने का संकेत कर रहा है... क्योंकि जिस तरह की लापरवाही पुल निर्माण, रेलवे लाइन व अन्य तरह की निर्माण गतिविधियों में सामने आती रही है, उसका यही संदेश व सबक है कि जनता की जान का मूल्य समझने की संवेदना दिखाने के लिए हमें प्रशासनिक स्तर पर अभी और गंभीर होना होगा.., तभी हादसे रुकेंगे...
दृष्टिकोण
केन्द्र का नौकरियों पर ध्यान...
केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया था और उस दिशा में मोदी सरकार ने तेजी से कदम बढ़ाना भी प्रारंभ कर दिया है... अगर कहें कि किसी भी देश व समाज के सर्वांगिण विकास का आधार उसके नागरिकों को पर्याप्त रूप से मिलने वाले उस रोजगार के अवसर में देखा जाता है, जो उन्हें न केवल कार्य कुशलता के मान से सेवा का अवसर दे, बल्कि उनकी योग्यता का उचित मूल्यांकन भी कर सके... तभी तो प्रधानमंत्री ने गत दिनों गुजरात में आयोजित रोजगार मेले में स्पष्ट रूप से कहा कि युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों की संख्या में वृद्धि होगी... यही नहीं केन्द्र सरकार ने धनतेरस के दिन राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार मेले का आयोजन कर 75 हजार अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे है... यह सरकार की आने वाले महीनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पर आयोजित होने वाले रोजगार मेलों के जरिये हर हाथ को काम या हर हुनरमंद को अवसर देने की पहल के रूप में देखा जाना चाहिए... अगर इससे भी आगे बढ़कर बात करे तो भारत के रक्षा मंत्रालय ने नौकरी देने के मामले में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया है... 29.2 लाख लोगों को रोजगार देने के साथ रक्षा मंत्रालय विश्व का सबसे बड़ा नियुक्ता बन चुका है... क्योंकि इसमें तीनों सेना के सभी विभागों की नौकरियां शामिल है... आज 29.1 लाख अमेरिकी रक्षा और पीएलए में 25 लाख है... जबकि 23.0 लाख कर्मचारी वालमार्ट और अमेजन में 16 लाख कर्मचारी कार्यरत है... इस मान से देखें तो भारत का रक्षा मंत्रालय आज 29.2 लाख लोगों को रोजगार यानी नौकरी दे रहा है... इसलिए सरकार ने अग्निवीर योजना के जरिये भी रोजगार के अवसर बढ़ाने की व्यापक पहल की है... केन्द्र सरकार रोजगार/नौकरी के अपने वादे को लेकर अडिग़ नजर आती है...