ब्राह्मण कौन?
   Date01-Nov-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
भ गवान बुद्ध जैतवन में ग्रामवासियों को उपदेश कर रहे थे। शिष्य अनाथपिंडक भी समीप बैठा धर्म चर्चा का लाभ ले रहा था। तभी सामने से महाकश्यप, मौद्गल्यायन, सारिपुत्र, चुंद और देवदत्त आदि आते हुए दिखाई दिए। उन्हें देखते ही बुद्ध ने कहा 'ब्राह्मण मंडली आ रही है, उनके योग्य आसन का प्रबंध करो।Ó अनाथपिंडक ने आयुष्मानों की ओर दृष्टि दौड़ाई, फिर आश्चर्य व्यक्त करते हुए बुद्ध से कहा-'भगवन्! ब्राह्मण तो इनमें कोई एक ही है, शेष कोई क्षत्रिय, कोई वैश्य और कोई अस्पृश्य भी हैं।Ó यह सुनकर बुद्ध हंसे और बोले- 'तात्! जाति जन्म से नहीं, वरन गुण, कर्म और स्वभाव से पहचानी जाती है। श्रेष्ठ, रागरहित, धर्मपरायण, संयमी और सेवाभावी होने के कारण ही मैंने इन्हें - ब्राह्मण कहा है।Ó