मुस्लिम पर्सनल लॉ से ऊपर है देश का कानून
   Date01-Nov-2022

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नाबालिग लड़की की शादी को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय की टिप्पणी
स्वससे ठ्ठ बेंगलुरु
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दो अलग-अलग मामलों में माना है कि पॉक्सो अधिनियम और आईपीसी लड़कियों की शादी की उम्र के संबंध में मुस्लिम पर्सनल लॉ कानून को ओवरराइड कर देता है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि एक नाबालिग मुस्लिम लड़की की शादी 15 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी। न्यायमूर्ति राजेंद्र बादामीकर की पीठ ने कहा कि पॉक्सो एक्ट एक विशेष अधिनियम है और यह पर्सनल लॉ को ओवरराइड करता है और इस अधिनियम के अनुसार, यौन गतिविधियों में शामिल होने की आयु 18 वर्ष है। पीठ ने कहा याचिकाकर्ता पीडि़ता का पति है और इन तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कि शादी को लेकर कोई गंभीर विवाद नहीं है। याचिकाकर्ता ने खुद न्यायालय के समक्ष संबंधित दस्तावेज भी पेश किए हैं।
यह है मामलाबता दें कि कर्नाटक उच्च न्यायालय एक 27 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसकी पत्नी 17 साल की थी और गर्भवती हो गई थी। आरोपी के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 9 और 10 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए केस दर्ज किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने एक नाबालिग मुस्लिम लड़की से शादी की और उसे गर्भवती कर दिया।