दुष्कर्म की जांच के लिए 'टू-फिंगर टेस्ट' पर रोक
   Date01-Nov-2022

ed5
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा- ये साइंटिफिक नहीं, सरकार किसी भी हालत में इसे न होने दे
स्वससे ठ्ठ नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने दुष्कर्म मामले में टू-फिंगर टेस्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने यह चेतावनी भी दी है कि इस तरह के टेस्ट करने वाले व्यक्तियों को कदाचार का दोषी ठहराया जाएगा।
पीठ ने कहा कि दुर्भाग्य है कि यह टेस्ट आज भी जारी है। पीठ ने स्वास्थ्य मंत्रालय को निर्देश दिया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्थिति में यौन उत्पीडऩ या दुष्कर्म सर्वाइवर का टू फिंगर टेस्ट नहीं होना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ सुनवाई की, जहां न्यायालय ने आरोपियों को रिहा कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने इन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
पीठ ने एक दुष्कर्म मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि न्यायालय ने बार-बार रेप केस में टू फिंगर टेस्ट नहीं करने आदेश दिया है। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसके बजाय यह महिलाओं को बार-बार दुष्कर्म की तरह ही प्रताडि़त करता है। यह टेस्ट एक गलत धारणा पर आधारित है कि एक सेक्शुअली एक्टिव महिला का बलात्कार नहीं किया जा सकता है।
चिकित्सा पाठ्यक्रम से भी हटाया जाए
पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों को यह निर्देश भी दिया कि टेस्ट से जुड़े दिशा-निर्देश सभी सरकारी और निजी अस्पतालों तक पहुंच जाएं। इसके अलावा न्यायालय ने स्वास्थ्यकर्मियों को कार्यशाला के जरिए अपराधी की जांच करने वाले दूसरे टेस्ट का प्रशिक्षण देने भी कहा। साथ ही चिकित्सा पाठ्यक्रम का रिव्यू करने कहा है, ताकि इसे हटाया जा सके और भावी डॉक्टर्स इस टेस्ट की सलाह न दें।