कार्य अनुरूप परिधान
   Date20-Oct-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
मृ तक को दाह-संस्कार के लिए जाते देख एवं जरा-व्याधि से ग्रस्त व्यक्ति को पीड़ा पाते देख, राजकुमार सिद्धार्थ के मन में वैराग्य का जन्म हुआ। उन्होंने वैराग्य के उन्हीं क्षणों में राजमहल को छोडऩे की तैयारी कर ली। उनके राजमहल छोड़ते समय उनका बाल सखा और सहायक चन्ना भी उनके साथ था। सिद्धार्थ व चन्ना दो अश्व लेकर राज्य की सीमा तक पहुंचे। वहां पहुंचकर सिद्धार्थ ने तलवार से अपने केश काटे और चन्ना को वापस लौट जाने का आदेश दिया। इसके बाद सिद्धार्थ वन प्रदेश में चले गए, जहां उन्हें एक शिकारी मिला। उन्होंने शिकारी से अपने वों का आदान-प्रदान करने को कहा, जिसके लिए वह सहर्ष तैयार हो गया। सिद्धार्थ को राजसी वों को यों त्यागते देख शिकारी ने उनसे ऐसा करने का कारण पूछा तो सिद्धार्थ बोले - मित्र! जब मैं संन्यास पथ पर बढ़ चला हूं तो मुझे उसी के अनुरूप व धारण करने चाहिए। कार्य के अनुरूप परिधान होने से मन-मस्तिष्क पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।