सुलह की संभावना...
   Date19-Oct-2022

vishesh lekh
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-अमेरिका, चीन-अमेरिका, भारत-चीन, भारत-पाक और अन्य देशों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को लेकर अनेक तरह की शंका-अशंकाएं जन्म ले रही है... रूस-यूक्रेन के इस टकराव के सबसे गंभीर और संवेदनशील स्वरूप में पहुंचने के बावजूद यह उम्मीद बनी हुई थी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें जारी थीं कि किसी तरह यह जंग रुके और दोनों देशों के बीच सुलह हो... मगर बीते कुछ दिनों के घटनाक्रम से यह आशंका पैदा हो गई है कि यह युद्ध कहीं दुनिया के अन्य देशों के बीच भी न फैल जाए... हाल ही में रूस के क्रीमिया पुल के एक हिस्से को तबाह कर दिया गया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव ने गंभीर शक्ल अख्तियार कर ली थी... उस हमले के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमले तेज कर दिए थे और तभी इस बात की आशंका उभरी थी कि शायद हालात और बिगड़े... इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस की निंदा करने से लेकर अन्य स्तर पर युद्ध खत्म कराने की कोशिशें जारी थीं... अब जो नया घटनाक्रम सामने आया है, वह न केवल यूक्रेन, बल्कि समूचे विश्व के लिहाज से चिंताजनक है... हाल में यूक्रेन ने नाटो में शामिल होने को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी, जिसके बाद नए वैश्विक समीकरण बनने की संभावना बनी... लेकिन नाटो की सुगबुगाहट के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का जो रुख सामने आया है, उसने दुनिया के तमाम देशों की चिंता बढ़ा दी है... पुतिन ने साफ लहजे में कहा है कि अगर किसी भी मामले में रूसी सेना के साथ नाटो सैनिकों का सीधा संपर्क या फिर टकराव हुआ तो यह एक बहुत ही खतरनाक कदम होगा, जो वैश्विक तबाही का कारण बन सकता है और मुझे उम्मीद है कि जो लोग ऐसा कह रहे हैं, वे इतने समझदार हैं कि ऐसा कदम न उठाएं। रूस ने जिन हालात में और जो वजहें बता कर यूक्रेन पर हमला किया था, उसके मद्देनजर देखें तो अगर सचमुच नाटो सैन्य स्तर पर दखल देता है, तो युद्ध के भावी स्वरूप और त्रासदी की कल्पना की जा सकती है... खासकर पुतिन ने जिस भाषा में टकराव के नतीजों के बारे में चेतावनी दी है, उससे कई तरह की आशंकाएं खड़ी हो गई हैं... दरअसल, पुतिन पहले ही यह कह चुके हैं कि वे रूस को सुरक्षित रखने के लिए परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकेंगे... इसके बाद जी-7 देशों के समूह ने कहा था कि रूस की ओर से किसी भी तरह के रासायनिक, जैविक और परमाणु हथियारों का इस्तेमाल बेहद गंभीर हालात पैदा करेगा...
दृष्टिकोण
अरिहंत का रणनीतिक संदेश...
भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी रूप से सामरिक दक्षता हासिल करने का एक रिकार्ड बनाया है... रणनीतिक रूप से ही नहीं, कूटनीतिक रूप से और सामरिक दृष्टि से इस नई उपलब्धि के बहुत मायने है... परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आइएनएस अरिहंत के जरिये कामयाब परीक्षण के साथ ही भारत ने जल सेना के मोर्चे पर एक मील का पत्थर कायम किया है... इस परीक्षण को इसलिए ज्यादा महत्व दिया जा रहा है कि इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता है...गौरतलब है कि आईएनएस अरिहंत रणनीतिक लिहाज से भारत की सबसे महत्वपूर्ण पनडुब्बी है और जल क्षेत्र में युद्ध के मद्देनजर इसकी उपयोगिता जगजाहिर रही है...रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस मिसाइल का परीक्षण पूर्व निर्धारित सीमा तक किया गया... इसने बंगाल की खाड़ी में तय लक्ष्य पर जो निशाना साधा, वह पूरी तरह सटीक रहा... इससे पहले परीक्षण निश्चित पानी के नीचे के पोंटून से किए गए थे, लेकिन इस बार पनडुब्बी के जरिये ही मिसाइल छोड़ा गया... इसके अलावा, मिसाइल परीक्षण ने अपने सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को पूरा किया... इस सफल परीक्षण से यह भी साबित हुआ कि अब स्वदेशी आईएनएस अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियां दुश्मनों की किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं... दरअसल, मौजूदा विश्व के बदलते आयाम के बीच समंदर और इसकी सतह के नीचे की क्षमताओं पर भी किसी युद्ध के नतीजे निर्भर करेंगे... पिछले कुछ सालों से भारत अपने आसपास जिस तरह की चुनौतियों से घिरा है और खासतौर पर चीन और पाकिस्तान का जैसा रुख सामने आता रहा है, उसमें हर मोर्चे पर बरती गई सावधानी ही एक सबसे अहम मोर्चा है...