चुनावी बांड काला धन नहीं - केन्द्र
   Date15-Oct-2022

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चुनावी बांड योजना के खिलाफ याचिका पर सुनवाई ६ दिसम्बर को
चुनावी बांड योजना के खिलाफ दायर हुई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट अब 6 दिसंबर को सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट उसी दिन यह परीक्षण करेगी कि क्या मामले को बड़ी पीठ को सौंपा जाना चाहिए। उधर, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चुनावी बांड की पद्धति राजनीतिक फंडिंग का बिल्कुल पारदर्शी तरीका है और काला धन या बेहिसाब धन प्राप्त करना असंभव है। एनजीओ की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने 5 अप्रैल को तत्कालीन सीजेआई एनवी रमना के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया था। इस मुद्दे को एक महत्वपूर्ण बताते हुए कहा था कि इस पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ की याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई थी लेकिन यह किसी अदालत के सामने नहीं आई। राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए राजनीतिक दलों को दिए गए नकद चंदे के विकल्प के रूप में चुनावी बांड पेश किए गए हैं। एनजीओ ने 2017 में राजनीतिक दलों के अवैध और विदेशी फंडिंग और सभी राजनीतिक दलों के खातों में पारदर्शिता की कमी के माध्यम से भ्रष्टाचार और लोकतंत्र की तोडफ़ोड़ के कथित मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की थी। एनजीओ ने पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनाव से पहले मार्च 2021 में एक अंतरिम आवेदन दायर किया था जिसमें मांग की गई थी कि चुनावी बांड की बिक्री की विंडो को फिर से नहीं खोला जाए।