तनाव असंतुलित जीवनशैली की उपज
   Date15-Oct-2022

dharmdhara
धर्मधारा
वन यात्रा में तन-मन की थकान स्वाभाविक है। अधिक श्रम, पारिस्थितिक दबाव या तनाव के कारण शरीर व मन पर अत्यधिक खींच-तान करने की स्थिति में हमारी दैनिकचर्या प्रभावित होती है। इसके लिए विश्राम की आवश्यकता पड़ती है। जीवन-साधना में नींद के साथ विश्राम तन-मन को तरोताजा कर देता है और कार्य को एकाग्रचित्त होकर करना संभव बनाता है। इसलिए जीवनशैली में विश्राम को स्थान देना महत्वपूर्ण हो जाता है। अत: कुछ तन-मन को विश्रांति देने वाले तौर-तरीकों की चर्चा यहां की जा रही है। शारीरिक विश्राम के लिए योग में प्रचलित श्वसन की प्रक्रिया बहुत उपयोगी रहती है, जिसमें शरीर के शिथिलीकरण का अभ्यास किया जाता है। इसमें पीठ के बल लेटकर शरीर के एक-एक अंग-प्रत्यंग पर ध्यान केंद्रित करते हुए इनकी थकान व खिंचाव को अनुभव करते हुए इन्हें ढीला छोड़ा जाता है। इसके साथ विश्राम के लिए अन्य योगासनों का अभ्यास भी किया जा सकता है। शरीर में प्रविष्ट थकान को दूर करने में मालिश बहुत उपयोगी रहती है। इसका विशेष लाभ लेने के लिए किसी जानकार से सहायता ली जा सकती है। शरीर से अधिक व्यक्ति मानसिक तनाव, दबाव एवं खिंचाव के कारण थक जाता है, जिसका स्नायविक संस्थान से लेकर शरीर एवं मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके कारण व्यक्ति की एकाग्रता, स्मरणशक्ति एवं कार्य में रूचि कुंद पड़ जाती है और जीवन की यात्रा एक बोझिल सफर बन जाती है। इसके लिए मन को विश्रांत करने वाली जीवनशैली के नियमों का अनुसरण आवश्यक हो जाता है। यहांं दैनिक जीवन में मानसिक विश्राम के कुछ उपयोगी सूत्रों की चर्चा की जा रही है। धीरे-धीरे गहरा श्वास लें, इसका अभ्यास मन को शांत करने में प्रभावी रहता है। इसके साथ शीतकारी, शीतली जैसे प्रशांतक प्राणायामों का अभ्यास किया जा सकता है। किसी योग्य योग शिक्षक की देख-रेख में इन्हें सीखा जा सकता है।