आत्मविश्वास
   Date14-Oct-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
अ नंतपुर में राजा रामदत्त का राज्य था। अनंतपुर की सीमा के समीप गंगादास नामक शिल्पी पत्थर की सुंदर-सुंदर मूर्तियां बनाया करता था। एक दिन राजा उधर से गुजरे तो गंगादास की बनाई मूर्तियों को देखकर मुग्ध हो गए। उन्होंने गंगादास से अपनी मूर्ति बनाने को कहा। गंगादास ने मूर्ति बनानी प्रारंभ कर दी, परंतु मूर्ति उसकी कल्पना के अनुरूप नहीं बन पा रही थी। उसने कई बार प्रयास किया, पर असफल रहा। वह हारकर बैठ गया। तभी उसकी नजर एक चींटी पर पड़ी, जो एक दीवार के उस पार गेहूं के दाने को लेकर जाना चाह रही थी, परंतु बार-बार गिर जाती थी, लेकिन उसने प्रयास नहीं छोड़ा और अंतत: वह सफल हो गई। गंगादास को यह दृश्य देखकर लगा कि जब निरंतर प्रयास से यह छोटी-सी चींटी सफलता पा सकती है, तो मैं क्यों नहीं? उसका खोया हुआ आत्मविश्वास लौटा। इस बार वह अपनी कल्पना के अनुरूप मूर्ति बनाने में सफल हो गया। राजा मूर्ति देखकर मंत्रमुग्ध हो गया। उसने गंगादास को बहुमूल्य उपहार दिए और उसे राजशिल्पी घोषित कर दिया।