मनुष्य की सफलता का मूलाधार प्राण ऊर्जा
   Date14-Oct-2022

dharmdhara
धर्मधारा
ब्र ह्मांड प्राणतत्व की प्रचुरता से ओत-प्रोत है। प्राणियों एवं वनस्पतियों के जीवन का मल आधार यही तत्व है श्रुति कहती है कि प्राणतत्व को समझने और उस पर नियंत्रण प्राप्त करने से प्रकृति के समस्त रहस्यों को जाना भी जा सकता है और अनुभव भी किया जा सकता है। प्राणवान व्यक्तियों के पीछे न केवल मनुष्य चलते हैं, वरन् प्रकृति की सारी शक्तियां भी उसकी अनुगामिनी होती हैं।
'बियोन्ड कोइन्सिडेन्सÓ नामक अपनी कृति में मूर्धन्य वैज्ञानिक व मनीषी डॉ. एलेक्स टेनस इस तथ्य की पुष्टि करते हुए लिखते हैं कि मेरी मान्यता है कि विश्व-ब्रह्मांड में एक सर्वव्यापी प्राण-ऊर्जा संव्याप्त है, जिसे अभी तक वैज्ञानिक उपकरणों से जाना नहीं जा सका है। जब तक उसे जानने के उपकरण उपलब्ध नहीं होते, तब तक पारिस्थितिक प्रमाण या आनुभविक प्रमाणों के आधार पर हमें ज्ञान एकत्रित करते रहना चाहिए। साथ ही जिस तरह से रेडियो और टीवी जैसे उपकरणों के कन्डेन्सर बिजली को संघनित करते हैं, ठीक वैसे ही हम भी उस ऊर्जा को धारण कर वांछित दिशा में प्रगति कर सकते हैं।
डॉ. एलेक्स टेनस के अनुसार-मनुष्य में उसकी प्राण-ऊर्जा का प्रभाव उसके शील, व्यक्तित्व, शिक्षा, रूचि, शारीरिक एवं मानसिक शक्तियों एवं वातावरण के अनुसार भिन्न-भिन्न हुआ करता है। इस ऊर्जा का नाम उन्होंने सीपीई अर्थात रचनात्मक-बोधात्मक ऊर्जा रखा है। स्वामी विवेकानंद ने इसे ही साइकिक फोर्स कहा है। उनका संकेत समष्टि मन की सर्वव्यापक क्षमता की ओर था, जिसके प्रभाव से डॉ. एलेक्स टेनस ने अतींद्रिय क्षमता का विकास कर लिया था। उनके अनुसार यह ऊर्जा व्यक्ति के अंतराल में प्रसुप्त अवस्था में विद्यमान रहती है, जिसे प्रयत्नपूर्वक साधनात्मक उपायों के द्वारा जाग्रत एवं विकसित किया जाता है। इसके जागरण से मनुष्य भूत, वर्तमान एवं भविष्य से संबंध स्थापित कर सकता है और उसे स्थान एवं काल का बंधन भी तब बांध नहीं सकते हैं।।