रात्रिकालीन बाजार संस्कृति...
   Date13-Oct-2022

vishesh lekh
उद्योग, व्यापार एवं कारोबार से जुड़े नियम-कानून केवल सरकार की किताबों या फिर शासन-प्रशासन के नियमावली के मान से ही नहीं बदलते हैं, कई बार इसको जनता की सुविधा एवं उनकी मांग के अनुसार भी रद्दोबदल किया जाता है... अनेक बार व्यापार-कारोबार एवं उनसे जुड़े नियमों में स्वयं विक्रेता अर्थात् मालिक भी संभावनाओं की दृष्टि से बदलाव करता है... कुलमिलाकर जब बाजार-व्यापार एवं कारोबार को नई गति देना हो या फिर उत्पादक-उपभोक्ता एवं विक्रेता में एक नया सामंजस्य पैदा करके बाजार गतिविधियों को निर्बाध संचालित करना हो, तब बाजार खुलने-बंद होने के नियमों में बदलाव की एक शैली निर्मित होती चली जाती है... जब बाजार को पूरी रात खुलने की प्रक्रिया देशभर के अनेक शहरों में अलग-अलग तरीके से अमल में आने लगी है, तो इसे रात्रिकालीन बाजार संस्कृति के रूप में एक मान्यता भी मिल रही है... राजधानी दिल्ली में जरूरत की सभी चीजें अब रातभर मिलने की राह खुल चुकी है... 300 से ज्यादा प्रतिष्ठानों को 24 घंटे खुले रखने की मंजूरी दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा दी गई है... इसमें होटल, परिवहन, दवा दुकानें, होम डिलेवरी, रेस्टोरेंट, होटल, दुकान/कारोबार आदि को शामिल किया गया है... इसके पहले मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भी बीआरटीएस कॉरिडोर पर करीब 11 किलोमीटर के इस क्षेत्र में आमने-सामने बाजार मॉल खुले रखने का रात्रिकालीन बाजार संस्कृति वाला प्रयोग शुरू हो चुका है... उसे कुछ हद तक प्रतिसाद भी मिला है... इससे पहले राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट व अन्य क्षेत्रों में रात्रिकालीन बाजार संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल हुई थी, लेकिन वह कोई असर नहीं दिखा सकी... यह उपभोक्ता और विक्रेता के मानस और उनकी जीवनशैली पर भी निर्भर करता है... अगर देशभर में बात करें तो मुंबई, कोलकाता, गोवा, बेंगलुरु में भी रात्रिकालीन बाजार संस्कृति का प्रयोग सफलतापूर्वक अमल में लाया जा रहा है... क्योंकि जब चुनिंदा प्रतिष्ठानों को आप रातभर खोलने की बात करते हैं तो परिवहन साधन अर्थात् सार्वजनिक प्रयोजन के तहत रात में कैब, टैक्सी या ऑटो की सुविधा उपलब्ध होना और उसका सुरक्षित होना जरूरी है... क्योंकि दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में मेट्रो आधी रात के बाद बंद हो जाती है, फिर इस रात्रिकालीन बाजार संस्कृति के सामने सबसे बड़ा यक्षप्रश्न कानून व्यवस्था बनाए रखना भी है... क्योंकि फिलहाल देशभर की रात्रिकालीन बाजार संस्कृति को युवा और उनमें भी होस्टलर्स का ही प्रतिसाद मिल रहा है...
दृष्टिकोण
इसरो की महती उपलब्धि...
विज्ञान व तकनीक ने विकास व निर्माण को जिस तरह से तेज गति प्रदान की है, इसी के साथ समय-श्रम के बीच संतुलन साधने की एक ऐसी राह भी बनाई, जिसके द्वारा हम अपने जीवन को सहज-सरल ही नहीं बना सकते हैं, बल्कि अपने कार्य की गुणवत्ता और उससे जुड़े प्रभाव को भी सकारात्मक दिशा में बढ़ा सकते हैं... हमारे विज्ञान एवं तकनीकी शोध केन्द्रों ने इस दिशा में नवाचार के जरिये ऐसे अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए,जो समय के साथ आधुनिक दौर में जरूरी थे... फिर चाहे फसलों के विविधतापूर्ण जीन्स में संशोधन करके अधिक उत्पादन व गुणवत्तापूर्ण फसलों का निर्माण हो या फिर तकनीक के जरिये अनेक तरह के विकास व निर्माण कार्यों को गति देना हो... भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है... इसरो की ताजा उपलब्धि इस मामले में महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इसरो ने एक बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए चंद्रयान-2 आर्बिटर में लगे एक्स-रे स्पेक्ट्रो मीटर क्लास ने पहली बार चंद्रमा की सतह पर प्रचुर मात्रा में सोडियम का पता लगाया है... इस नई खोज से चांद पर सोडियम की सटीक मात्रा का पता लगाने का रास्ता खुल गया है... बेंगलुरु में इसरो के यूआर राव उपग्रह केन्द्र में निर्मित इस क्लास में अपने उच्च संवेदी क्षमता और दक्षता के कारण सोडियम लाइन के स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध करवा रहा है... यही नहीं शोध में यह भी पाया गया है कि ऐसा संभवत: सोडियम अणुओं की एक पतली परत से भी मिले हो, जो चंद्रमा के कणों से कमजोर रूप से जुड़े होते हैं... यह पूरी खोजपरक उपलब्धि इसरो के लिए तो गर्वित क्षण है ही, भारत के अंतरिक्ष व विज्ञान अनुसंधान केन्द्रों के लिए भी बड़ी सफलता है... क्योंकि 22 जुलाई 2019 को श्री हरिकोटा से भारत ने चंद्रयान-2 रवाना किया था और उस दिशा में खोज व विस्तार से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आने लगे हैं...