अवंतिका का शाश्वत संदेश...
   Date12-Oct-2022

vishesh lekh
सप्त मोक्षपुरियों में शामिल अवंतिका अर्थात् धार्मिक, सांस्कृतिक एवं संस्कारधानी के रूप में विख्यात मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जयिनी का शाश्वत काल से एक अलग वैश्विक आलोक रहा है... यह शिक्षा, संस्कार और संस्कृति के प्रचार-प्रसार और उसके निरंतर पोषण की वह उर्वरा भूमि है, जो सदैव भारत एवं भारतीयता के मान को समरद्ध करती रही है... चार प्रमुख कुंभ स्थलों में अवंतिका का महत्वपूर्ण स्थान है... कुंभ भारत की सांस्कृतिक गर्भनाल का एक ऐसा महत्वपूर्ण सूत्र है, जो न केवल भारत की सांस्कृतिक बल्कि धार्मिक, वैचारिक पृष्ठभूमि को भी ब्रांडिंग के रूप में आगे बढ़ाता है... कुंभ का आयोजन अपने आप में बाबा श्री महाकाल के क्षेत्र में एक ऐसी विश्व प्रसिद्ध परंपरा एवं सनातन अनुष्ठान के रूप में देखा जाता है, जो प्रति बारह वर्ष में मध्यप्रदेश के आस्था-विश्वास एवं आध्यात्म को द्विगुणित कर देता है... ऐसी आलौकिक एवं शाश्वत आस्था की नगरी अवंतिका का मंगलवार को मंगलमय संदेश पूरे विश्व में गया है... क्योंकि करीब 20 एकड़ क्षेत्र में फैले श्री महाकाल लोक के पहले चरण का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों से लोकार्पण हुआ है... राष्ट्र को समर्पित यह सांस्कृतिक गलियारा न केवल महाकाल से जुड़े विविधतापूर्ण पक्षों, संदेशों, संवादों और उसके महत्व को नए तरीके से व्याख्यातीत करता है, बल्कि उज्जयिनी को एक नए आलोक के रूप में भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का निमित्त यह श्री महाकाल लोक बनने वाला है... क्योंकि 40 देशों में श्री महाकाल लोक के महत्व एवं स्थापना के साथ ही उसकी कलात्मक और संदेशात्मक विशेषता का प्रसारण हुआ है... यह सांस्कृतिक गलियारा केवल आस्था-विश्वास का विस्तार करने का निमित्त ही नहीं बनेगा, बल्कि इसके जरिये आर्थिक रूप से धार्मिक-सांस्कृतिक राजधानी उज्जैन का पुनर्रोदय होगा... इससे भी बढ़कर धर्म को आस्था-विश्वास के सांचे में ढालकर किस तरह से सांस्कृतिक विरासत एवं गौरवशाली इतिहास को नए तरह से सजाने-संवारने का प्रकल्प आगे बढ़ाया जा सकता है, जिससे न केवल लोगों को रोजगार में इसके द्वारा भारत की सांस्कृतिक अवचेतना को भी नूतन करने का प्रयास सफल हो सकेगा... काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद देश का सबसे बड़ा यह सांस्कृतिक गलियारा श्री महाकाल लोक अवंतिका की शाश्वत आस्था को नए तरह से परिभाषित और विस्तारित कर रहा है, इसके लिए प्रधान सेवक नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान साधुवाद के पात्र है...
दृष्टिकोण
जाति और राजनीति...
गुजरात में विधानसभा चुनाव का माहौल गरमाने लगा है... सत्तासीन भाजपा के साथ ही विपक्ष में बैठी कांग्रेस और पंजाब से नई ऊर्जा पाकर गुजरात फतेह के लिए निकली आआपा जोर आजमाइश में जुटे हैं... विशेष इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह चुनाव कांग्रेस और आआपा के लिए जीवन-मरण का सवाल है, क्योंकि पहले पायदान पर तो भाजपा ही रहेगी... क्योंकि जिस तरह का विकास व निर्माण कार्य करके भाजपा ने लोगों को जोड़ा है, उसे गुजरातवासी भुला नहीं सकते... लेकिन कांग्रेस-आआपा के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई है कि भाजपा के साथ सीधी भिड़ंत के बाद दूसरे पायदान पर कौन रहता है..? इसलिए तरह-तरह की बयानबाजी एवं दोषारोपण की राजनीति का खेल कांग्रेस व आआपा ने शुरू कर दिया है... कांग्रेस जहां तुष्टिकरण की राजनीति के जरिये अपने को आगे बढ़ाने पर उतारू है, तो आआपा का लक्ष्य कैसे भी कांग्रेस के वोट को अपने पाले में लाना है... तभी तो केजरीवाल हर सभा में यह कहना नहीं भूल रहे हैं कि कांग्रेस को दिया वोट खराब होगा... इसलिए आप आआपा को चुने... इससे भी बढ़कर केजरीवाल एक राजनीतिक हथकंडे के रूप में यह भी कहने से नहीं चूक रहे हैं कि गुजरात अब बदलाव मांग रहा है... भाजपा में रहकर ही आपको भाजपा को हराना है... यानी केजरीवाल भाजपा के प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को राजनीतिक प्रलोभन के जरिये भ्रमित करने का खेल खेल रहे हैं... गुजरात में जातिगत वोटों की राजनीति का समीकरण भी कांग्रेस-आआपा साधने का प्रयास कर रही है, तभी तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह कहना पड़ा कि उनकी जाति और राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखें बिना दो दशकों तक गुजरातवासियों ने आशीर्वाद प्रदान किया है... यानी मोदी की राजनीति जातिवाद पर केन्द्रित नहीं रही है... क्योंकि उन्होंने स्वीकारा है कि गुजरात की जनता 'मेरी जाति-मेरी राजनीतिक पृष्ठभूमिÓ को देखे बिना मुझे सेवा के लिए आशीर्वाद देती रही है और देती रहेगी...