क्रोध का फल
   Date11-Oct-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
ए क सांप को क्रोध के आवेश ने े घेरा। उसने फन फैलाकर गरजना और फुफकारना आरंभ किया और कहा- 'मेरे जितने भी शत्रु हैं, आज उन्हें मैं खाकर ही छोडूंगा, उनमें से एक को भी जिंदा न रहने दूंगा।Ó मेंढ़क, चूहे, केंचुए और छोटे-छोटे जानवर उसके उस गुस्से को देखकर डर गए और छिपकर देखने लगे कि आखिर होता क्या है? क्रोध के आवेश में सांप दिनभर फुफकारता रहा और दुश्मनों पर हमला करने के लिए दिनभर इधर-उधर बेतहाशा भागता रहा। फुफकारते-फुफकारते उसके गले में दर्द होने लगा। शत्रु तो कोई हाथ आया नहीं, पर कंकड़-पत्थरों की खरोंचों से उसकी सारी देह जख्मी हो गई। शाम को चकनाचूर होकर वह एक तरफ जा बैठा। क्रोध करने वाला शत्रुओं से पहले स्वयं को ही नुकसान पहुंचाता है। अनावश्यक आवेश अंतत: दु:ख ही पहुंचाता है।