हिन्दू समाज के प्रणेता हैं रामायण और वाल्मीकि - डॉ. भागवत
   Date10-Oct-2022

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संवेदना गायब होने पर पशुओं की तरह हो जाता है समाज
कानपुर द्य स्वससे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परमपूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शनिवार रात कानपुर पहुंचे। तीन दिवसीय प्रवास के पहले दिन रविवार को उन्होंने नानाराव पार्क में वाल्मीकि समाज के लोगों को संबोधित किया। इससे पहले उन्होंने पूर्व स्वयंसेवकों के पथ संचलन भी किया है।
नानाराव पार्क में संबोधन के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आपके सबके सामने आकर धन्य हुआ हूं। वक्ता कह रहे थे मैं मिठाई हूं, लेकिन में मिठाई नहीं बताशा बने रहना ही ठीक समझता हूं। मैं वाल्मीकि समाज के कार्यक्रम में जाता रहा हूं, लेकिन जयंती समारोह में पहली बार आया हूं। रामायण और वाल्मीकि हिन्दू समाज के प्रणेता थे। वह अगर रामायण नहीं लिखते तो हमें कुछ पता ही नहीं होता। समाज के सामने ऐसा चरित्र लाना चाहता हूं, जिसे समाज आदर्श माने। वाल्मीकि रामायण की रचना हुई। उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम में श्रीराम सबके आदर्श बने। उनके नाम का जप किया जाता है हर घर प्रतिष्ठित होते हैं, जो वाल्मीकि की राम के साथ हनुमान और वाल्मीकि का भी स्मरण किया है। राष्ट्र के हर किसी के लिए। भगवती सीता का पुत्री समान प्रतिपाल। एक बहेलिए ने कौंच पक्षी को मार दिया, इससे वाल्मीकि जी को क्षोभ हुआ। ऐसा क्यों हुआ, क्योंकि बहेलिए तो उन्हें मारते ही थे। इससे वाल्मीकि के मन में करुणा का भाव आ गया। करुणा चार भाव में से एक है। ऊंचा भया तो क्या भया जैसे पेड़ खजूर,फल लागे अति दूर, इसलिए करुणा जरूर होनी चाहिए।
अपनेपन का काम कर रहा है संघ- सरसंघचालक ने कहा कि अपनेपन का काम संघ कर रहा है। वाल्मीकि ने संपूर्ण हिंदू समाज के लिए काम किया। कोई भी स्थिति हो थकना नहीं, हारना नहीं, आगे बढऩा। वाल्मीकि ने लिखा है रावण विजय से पहले सिर्फ राम व वानर थे। रावण रथी विरथ रघुवीरा, लेकिन जब लोगों को विश्वास हो गया कि वह जीत सकते हैं तो ऐसी स्थिति बनी कानून व्यवस्था वाले ऐसा काम करें। हमें योग्य बनना है। समाज को योग्य बनाना है। संघ सबके साथ ताकत से खड़ा है देश हर में हर जगह। उनसे मिलिए कुछ भी करना होगा तो बताइए जरूर करेंगे। तीसरी बात करुणा और संवेदना की है। इसलिए अपने मन में सत्य प्रेम व करुणा लाएं। वही माता सीता है। लवकुश की तरह आप अपनों की चिंता करें। सारा समाज व सारा भारतवर्ष अपना है। यह सदैव रहेगा। इसकी चिंता आपको करनी होगी। कानून-व्यवस्था के साथ स्वयं भी अपने समाज को शिक्षित व संस्कारवान बनाएं। संवेदना लाएं। खराब आदतें छोड़ो। समाज मे मिलजुल कर स्वछता का पालन करो, आप खुद सबकी स्वच्छता की प्रेरणा हो। संपूर्ण मानव कल्याण के सिपाही आप सब बनेंगे।