भारत को विश्वगुरु का दर्जा दिलाने में सार्वजनिक -निजी भागीदारी अहम
   Date04-Jan-2022

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मोहाली ठ्ठ 3 जनवरी (वा)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत को शिक्षा, ज्ञान और विज्ञान में विश्वगुरु का पुन: दर्जा हासिल करने में सार्वजनिक-निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद अहम है तथा सरकार रक्षा क्षेत्र में भी निजी क्षेत्र को साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
श्री सिंह ने आज यहां चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में 'कल्पना चावला अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्रÓ के उद्घाटन के मौके पर अपने सम्बोधन में कहा कि भारत को शिक्षा, ज्ञान और विज्ञान में विश्व स्तर पर पहुंचाना तथा सही मायनों में विश्वगुरु दर्जा हासिल करना है तथा यह लक्ष्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी से ही सम्भव है। उन्होंने कहा कि जिस तरह कल्पना चावला ने दुनिया के पार अंतरिक्ष में जाकर अपना और अपने देश का नाम रोशन किया है, उसी तरह यह अनुसंधान केंद्र और इससे जुड़े विद्यार्थी आने वाले समय में नई-नई बुलंदियों को छूने में कामयाब होंगे।
उन्होंने कि मंगलयान जैसे मिशन, जिसके लिए लगभग दस गुना ज्यादा लागत लगाने के बाद भी अमेरिका और रूस जैसे देशों को 5-6 बार प्रयास करने पड़े, लेकिन भारत ने इसे पहली बार में ही सफलतापूर्वक लांच कर दिया। अब तक भारत ने अमेरिका, जापान, इजरायल, फ्रांस, स्पेन, संयुक्त अरब अमिरात और सिंगापुर समेत 34 देशों के 342 उपग्रह अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजे हैं।
गत महज़ तीन साल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस कार्य से 5600 करोड़ रुपए कमाये हैं, जो एक बड़ी बात है। जिस समय इसरो का गठन हो रहा था, उस समय अमेरिका और रूस जैसे देश इस क्षेत्र में काफ़ी आगे बढ़ चुके थे। यानी दुनिया में भारत को स्थान बनाना एक बड़ा और कठिन कार्य था। इसके बावजूद इसरो के वैज्ञानिकों की दिन-रात की कड़ी मेहनत और लगन, उनके उत्साह और विजऩ ने पांच दशक के अंदर देश को शीर्ष अंतरिक ताकतों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया।