इक्कीस की टीस पर फाहा की बाईसा उम्मीद...
   Date02-Jan-2022

parmar shakti
ब्रेक के बाद
शक्तिसिंह परमार
न ए वर्ष की शुरुआत में गत वर्ष का लेखा-जोखा व्यक्ति, संस्था-संगठन, समाज और राष्ट्र से जुड़ी उन्नति, अवनति के संदर्भ में होना वास्तव में हमें बीते वर्ष की चुनौतियों और अनुभवों को समग्र रूप से देख-समझकर आगे बढऩे का नजरिया उपलब्ध करवाता है...2021 की शुरुआत हमने कोरोना महामारी से लडऩे के लिए टीके के साथ की थी और विदाई बूस्टर डोज के साथ हो रही है...यानी कोरोना की भूल-भुलैया के बीच हमारे सामने यक्ष चुनौतियां अभी भी मुंहबाहे खड़ी हुई हैं...इसको समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा..,2019 जाते-जाते देश-दुनिया के समक्ष कोरोना जैसी महामारी का विकट संकट खड़ा करके गया था...फिर 2020 की शुरुआत से लेकर 2021 के अंत तक हमने जिस तरह का आर्थिक संकट झेला और परेशानियों से दो-चार हुए, उससे कोई अनभिज्ञ नहीं है...जैसे-तैसे हम उस संकट से उभरे ही थे कि 2022 के प्रारंभ में ही कोरोना महामारी का बहुरूपिया राक्षस डेल्टा के बाद अब 'ओमिक्रॉनÓ के नाम से अट्टाहस कर रहा है...ऐसे में 2021 हमें सिर्फ भयावह संकटों एवं आंख में खून उतर आने वाले मंजरों से सामना ही नहीं करवाकर गया है..,बल्कि इस भयावह चुनौती से उबरकर कैसे हम अपनी आर्थिक स्थितियों को मजबूत बनाए रखकर पुन: पटरी पर लौटने में सफल हुए हैं..? इसकी भी सीख यही चुनौतीपूर्ण 2021 हमें 2022 के लिए दे रहा है..!
बीत गए 2021 के उन भयावह घटनाक्रमों की 2022 में पुनरावृत्ति न हो, ऐसी प्रार्थना हम ईश्वर से कर सकते हैं..,क्योंकि कालचक्र का घटित होना तो निश्चित है..,लेकिन उससे बचने, बचाने के प्रयास हमारे हाथों में हैं...क्योंकि 2021 में हमने लगातार संकटों का सामना करते हुए अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए सिर्फ प्रयास ही नहीं किए..,बल्कि हर तरह की चुनौतियों का मुकाबला करने में भी सफलता प्राप्त की...यही तो हमें 2022 के लिए प्रभावी और स्थायी संदेश 2021 देकर गया है...शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचा और आम आदमी का जीवन बेहतर बनाने की दीर्घकालीन योजनाओं से भयावह संकटों में भी ध्यान न हटाकर 'ओमिक्रॉनÓ जैसे राक्षस से सामना करने में हम निश्चित रूप से सफल होंगे..,क्योंकि यही तो 2021 में मोदी सरकार ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर से उबरकर सिद्ध किया था... भविष्य में या फिर 2022 में ऐसे संकटों से हमें किस तरह लडऩा है..? क्या इसकी राह 2021 नहीं दिखा रहा है..? क्योंकि इन्हीं चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था भले ही 2 साल पूर्व की स्थिति को प्राप्त नहीं कर पाई.., लेकिन हालात आर्थिक तेजी से सुधर रहे हैं और विश्व को भारतीय अर्थव्यवस्था ही उम्मीदवान बना रही है...अत: पटरी पर लौट चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था को 'ओमिक्रॉन राक्षसÓ से बचाने के लिए समाज, सरकार और पूरे तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है...
वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के कारण प्रत्येक भारतीय को इंसानियत और हैवानियत का सामना भी करना पड़ा है...अगर कहें कि स्वर्ग और नर्क में क्या अंतर है..? इसका भान भी 2021 की यह महामारी विभीषिका करवा चुकी है...क्या 2021 ने जो असहनीय पीड़ा, प्रताडऩा का मंजर निर्मित किया है.., उन सभी दुखती रगों, रिश्ते घावों और रह-रहकर उभरती टीस पर फाहा रखने की 2022 से उम्मीद नहीं कर सकते हैं..? इसके लिए हमें बीते वर्ष के कटु अनुभवों और स्मरणीय पलों को अपने मन-मस्तिष्क में निरंतर मथना होगा...क्योंकि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग 2021 में कोरोना महामारी की पीड़ाओं और आपदापूर्ण संकटों का सर्वाधिक शिकार हुए हैं...मानों उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा हो..! अभी तक कोरोना से भारत में करीब 5 लाख जिन्दगियां कालकलवित हो चुकी है...इन कुल मौतों में करीब 35 फीसदी मातृशक्ति हैं...भारत में महिलाओं की कार्यबल क्षमता 24 फीसदी से अधिक है...लेकिन तालाबंदी में नौकरी और रोजगार गंवाने वाली भी 28 फीसदी महिलाएं रही हैं...ऐसे में इनकी पीड़ाओं का समाधान 2022 में करना हमारी प्राथमिकता होना ही चाहिए...
बुजुर्ग हमारे प्रेरणाोत है और उनके अनुपम अनुभव की गठरी हमें अनेक तरह की चिंताओं व संकटों से मुक्ति की राह दिखाती है...लेकिन इन्हीं वरिष्ठजनों ने कोरोना में सर्वाधिक प्रताडऩा झेली है...करीब 73 प्रतिशत बुजुर्गों को उत्पीडऩ का शिकार इसी कोरोनाकाल में होना पड़ा है...फिर उन नौनिहालों को भी ध्यान रखना होगा..,जिन्होंने अपनों को खोने के साथ पढ़ाई छूट जाने के चलते गहरे अवसाद का सामना किया...देश में करीब 1.1 लाख (सिर्फ सरकारी आंकड़ा) बच्चों ने माता/पिता/परिजन/अभिभावक/रिश्तेदार को खोया है...तभी तो अपना आश्रयदाता खो चुके इन नौनिहालों को अदृश्य अवसाद की पीड़ा ने जकड़ा और 2021 में प्रतिदिन 31 बच्चों ने आत्महत्या की...क्या इस तरह की संवेदनशून्यता से बचने का प्रयास हमें नए वर्ष में नहीं करना होगा..? क्योंकि एक बड़े वर्ग को महंगाई और रोजगार गंवाने की समस्या ने भी झकझोरा है...करीब 66 फीसदी लोगों की आजीविका को कोरोनाकाल लील गया...शहरी बेरोजगारी 9.1 फीसदी बढ़ी...जबकि थोक महंगाई दर 14.2 प्रतिशत पर पहुंची है.., जो कि 12 वर्षों के सर्वाधिक उच्चतम स्तर पर है... फिर भी इन सभी चुनौतियों से लड़कर ही हम 2022 की दहलीज पर खड़े हैं...यही हमारी जिजीविषा है...
किसी ने सोचा नहीं था कि हम आपदा और कोरोनाकाल द्वारा निर्मित संकट को अवसर में बदलने की भारत की पुरातन आत्मनिर्भर प्रवृत्ति का दुनिया के सामने प्रमाण प्रस्तुत कर देंगे...ऑक्सीजन की कमी से जिंदगियां गंवाने के बाद हमने ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य भी इसी संकट में प्राप्त किया...1500 से अधिक ऑक्सीजन प्लांट देशभर में लगभग बनकर तैयार हैं...इसके लिए 300 करोड़ से अधिक का बजट भी केंद्र सरकार ने उपलब्ध करवाया...यह संकटों से लडऩे की राष्ट्र मुखिया की उस नीति-नीयत का प्रमाण है..,जो सबको साथ लेकर संकट से लडऩे के लिए हर स्थिति में तैयार रहने का आत्मबल और विश्वास जगाता है...यही तो हमें 2022 की संभावित चुनौतियों और संकटों से मुक्ति के लिए आश्वस्त कर रहा है...क्योंकि बिक्री गिरने, उत्पादन घटने और मुनाफा बढऩे की इस स्थिति का आकलन करें तो हमने इसी संकट काल में 'वर्क फ्रॉम होमÓ और 'स्टडी फ्रॉम होमÓ जैसे अनेक सकारात्मक-नकारात्मक बदलावों को सामने रखकर स्थितियां बदली हैं...लेकिन पूंजी असमानता ने हमें यह दृश्य भी दिखाया कि सूचीबद्ध कंपनियों ने कुल 2.39 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया..,जो कि 2020 की तुलना में 46 फीसदी अधिक है...ऐसे में हमें इन बिंदुओं पर भी विचार-मंथन और समाधान के साथ आर्थिक समानता हेतु पहल व प्रयास करना होंगे..!
वर्ष 2021 राजनीतिक उठापटक के मान से भी महत्वपूर्ण रहा है...पश्चिम बंगाल में ममता की वापसी या टूलकिट, पेगासस मामला, किसान आंदोलन, लक्षद्वीप विवाद, असम-मिजोरम हिंसा, केरल, तमिलनाडु, असम और पुड्डुचेरी की हार-जीत से बदले राजनीतिक समीकरण बहुत कुछ कह रहे हैं... अब 2022 में उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर के विधानसभा चुनावों के परिणामों से राष्ट्रीय राजनीति के सियासी ऊंट की करवट तय होगी...वैश्विक फलक पर कूटनीतिक, सामरिक और द्विपक्षीय संबंधों पर 2021 में कोरोना की बड़ी छाया रही...क्योंकि सबकुछ ऑनलाइन हुआ..,लेकिन 2022 में स्थिति सुधार की संभावनाएं हैं...परराष्ट्र नीति के अंतर्गत 2022 में जी-20 देशों की अध्यक्षता का अवसर भारत को मिला है...2023 में जी-20 देशों की पहली बार बैठक भारत में होगी...इस समूह में अमेरिका, यूरोप समेत दुनिया की ताकतवर आर्थिक शक्तियां शामिल हैं, जिनका दुनिया के कुल आर्थिक प्रतिनिधित्व में 80 फीसदी हिस्सा है...ऐसे में इनका नेतृत्व भारत को अपने पड़ोसियों के सामने नई भूमिका में खड़ा करेगा...लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से ठंड का 100 साल का रिकार्ड तोडऩा यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका तक के जंगलों में धरती के ताप बढऩे से आग लगना हमें ग्लोबल वार्मिंग के प्रति चेतावनी है...इसलिए वर्ष 2021 की टीसों पर फाहा रखने का हमारे लिए वर्ष 2022 अवसर है...