बचाव का तरीका बदलें...
   Date14-Jan-2022

vishesh lekh
वैश्विक महामारी कोरोना के डेल्टा बहुरूप और बदली हुई स्थितियों में ओमिक्रॉन बहुरूप ने जो रफ्तार पकड़ी है, वह देश-दुनिया के लिए चिंताजनक है... क्योंकि अफ्रीकी देशों में तबाही मचाने वाला ओमिक्रॉन शनै: शनै: अमेरिका-चीन से लेकर भारत में भी अब अपना असर दिखाने लगा है... कोई इसे विदेशों में चौथी लहर के रूप में देख रहा है तो भारत में तीसरी लहर के रूप में इससे लडऩे की जद्दोजहद जारी है... इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस महामारी से बचने का अंतिम उपाय तो फिलहाल टीके के अलावा किसी के पास और कुछ नहीं है... क्योंकि टीका भी कितने दिनों तक और कब तक प्रभावी रहेगा, इसकी कुछ सुनिश्चित अवधि नहीं है, तभी तो भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में सतर्कता टीका अर्थात् बूस्टर डोज की अनिवार्यता को देखते हुए लगाना प्रारंभ कर दिया है... ऐसे में सवाल यह है कि क्या भारत में संभावित चौथी लहर और विश्व में पांचवीं-छठी लहर सिर-माथे आ गई तो क्या फिर कोई नया सतर्कता टीका अर्थात् अतिरिक्त बूस्टर डोज की तरफ कदम बढ़ाना पड़ेगा..? इसलिए अब कोरोना महामारी से लडऩे के तौर-तरीके बदलना होंगे... इसके लिए जरूरी है कि जीवनशैली को कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ उससे लडऩे वाली प्रवृत्ति के रूप में तैयार किया जाए... क्योंकि जब भारत में संक्रमण का ढाई लाख का आंकड़ा पार हो रहा है तो यह ध्यान देने की जरूरत है कि संक्रमण के मान से मौतें नहीं हो रही हैं... क्योंकि टीके का असर और वर्षभर में लोगों की संक्रमण से लडऩे की मानसिक तैयारी में भी इस पर असर दिखाया है... इसलिए यह कोरोना राक्षस भले ही कितने रूप बदल ले, इससे लडऩे के लिए हमें निरंतर तैयार रहना होगा... अगर कहें कि वायरस रूप बदल-बदलकर आते रहेंगे और मनुष्य को अपना जीवन बचाए रखकर जिंदगी को निरंतर पटरी पर बनाए रखने के लिए कुछ नियम-संयम वाली शर्तों के साथ जीवन को आगे बढ़ाना होगा... जैसे बिना वजह भीड़ का हिस्सा न बनना, स्वच्छता के साथ ही कोविड नियमों का अपनी जीवनशैली के मान से पालन करना हो... क्योंकि फिलहाल ओमिक्रॉन ही तीन रूपों में बंट चुका है... अब वह किस रूप में किस तरह से शरीर की बनावट व प्रकृति पर असर करेगा, यह तो बाद में पता चलेगा... क्योंकि ओमिक्रॉन (बी.1.1.529) स्वरूप के तीन उपरूप यानी सब वैरिएंट बीए.1,बीए.2 और बीए.3 विकसित हो चुके हैं... और इसी पहले रूप में तेजी से फैलकर डेल्टा की जगह लेना प्रारंभ कर दी है... अत: इस कोरोनारूपी राक्षस से लडऩे के तौर-तरीके बदलकर ही उसी की शैली में जवाब देना होगा...
दृष्टिकोण
चुनाव पूर्व की उठापटक...
उत्तरप्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है, इसी के साथ कड़ाके की सर्दी के साथ राजनीति का पारा अपने ही तेवर दिखा रहा है... जिस तरह से राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए हाथ-पैर मारने का दौर चल रहा है, यह राजनीति के चुनावी मोड को दर्शाता है यही कि स्थिति किसी भी दल के लिए अनुकूल नहीं है... सत्तासीन योगी सरकार के करीब 13 विधायकों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया है... जिसमें स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, भगवती सागर, रोशनलाल वर्मा, अवतार सिंह भाड़ाना, ब्रजेश प्रजापति, मुकेश वर्मा, राकेश राठौर, जय चौबे, माधुरी वर्मा, आर.के. शर्मा और बाला प्रसाद अवस्थी शामिल हैं... ये ऐसे विधायक और मंत्री हैं, इन्हें आशंका है कि उत्तरप्रदेश में एम.वाय. समीकरण कुछ ज्यादा ही हावी है... अर्थात् मुस्लिम-यादव का गठजोड़ के चलते इन लोगों को अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती नजर आ रही है... ऐसे में भाजपा छोडऩे वाले विधायक और मंत्री कुछ अलग तरह के आरोप लगाकर अपनी दुखती रग छुपाने का प्रयासभर कर रहे हैं... लेकिन जनता भी यह समझती है कि जिनका राजनीतिक अस्तित्व ही पालाबदल रहा है तो वे आखिर कब तक दलों, नेताओं और मतदाताओं की आंखों में धूल झोंकने में सफल होते रहेंगे..? क्योंकि गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तरप्रदेश के चुनाव संबंधी महामंथन बैठक के बाद इस बात के तो संकेत कर दिए हैं कि वर्तमान विधायकों के टिकट तो कटना हैं, लेकिन जो संख्या आशंका के अनुसार 150 बताई जा रही है, वह 40 से 50 ही रहेगी... ऐसे में हो सकता है कि कुछ और दल-बदल करने वाले ठिठक जाएं, लेकिन इतना तो तय है कि जो पाला बदल चुके हैं, उनके लिए दूसरे पाले में भी राह आसान नहीं है... क्योंकि उप्र में इस बार योगी का काम सब पर भारी नजर आ रहा है...