corona
   Date09-Sep-2021

sx1_1  H x W: 0
'यह नहीं माना जा सकता कि कोरोना की दूसरी लहर में लापरवाही से हुईं मौतेंÓ
नई दिल्ली ठ्ठ 8 सितम्बर (ए)
उच्चतम न्यायालय ने कोरोना में हुई मौत को चिकित्सकीय लापरवाही मानकर मुआवजे का अनुरोध करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए बुधवार को कहा कि अदालतें यह मानकर नहीं चल सकतीं कि वैश्विक महामारी की दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 से हुई सभी मौतें लापरवाही के कारण हुईं।
न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ ने दीपक राज सिंह की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह अपने सुझावों के साथ सक्षम प्राधिकारियों को अपना प्रतिनिधित्व दें। खंडपीठ ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर का पूरे देश में बुरा प्रभाव पड़ा था और यह नहीं माना जा सकता कि सभी मौतें लापरवाही के कारण हुईं।
शीर्ष अदालत ने गत 30 जून के अपने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस फैसले में उसने मानवता को लेकर अपना दृष्टिकोण रखा था, न कि यह कहा था कि लापरवाही के कारण मौतें हुई हैं। गौरतलब है कि उक्त फैसले में न्यायालय ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को कोविड-19 से मरने वाले लोगों के परिजनों को अनुग्रह राशि के लिए छह सप्ताह के भीतर उचित दिशा-निर्देशों की अनुशंसा का निर्देश दिया था। उधर उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को दिए गए विस्तार में हस्तक्षेप करने से बुधवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बीआर गवई की खंडपीठ ने गैर-सरकारी संगठन कॉमन कॉज की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि दुर्लभ और असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार को ईडी के निदेशक के कार्यकाल को दो साल से आगे बढ़ाने की शक्ति मौजूद है। न्यायालय ने कहा कि पहले से चल रही जांच को सुविधाजनक बनाने के लिए ऐसा विस्तार दिया जा सकता है। न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा 13 नवम्बर, 2020 को पारित आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि श्री मिश्रा का कार्यकाल अब आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। खंडपीठ की ओर से न्यायमूर्ति राव ने फैसले का कुछ अंश पढ़कर सुनाया। न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार को, हालांकि सेवा विस्तार की अपनी शक्ति को केवल दुर्लभ परिस्थितियों में ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही न्यायालय ने कॉमन कॉज की याचिका खारिज कर दी।