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   Date06-Sep-2021

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भोपाल ठ्ठ 5 सितम्बर (ब्यूरो)
.स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) और सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षक भारत की शिक्षा व्यवस्था के आदर्श, मूल्य और संस्कार के वाहक हैं। शिक्षक भारत की सनातन परंपरा का पालन करते हुए विद्यार्थियों को पढ़ाने-लिखाने तक सीमित न होकर, उन्हें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला एक व्यक्तित्व है। श्री परमार वल्लभ भवन में वर्चुअली ऑनलाइन आयोजित 'राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोहÓ में शिक्षण क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित कर रहे थे। श्री परमार ने शिक्षकों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों के भविष्य को आकार देते है और इस तरह राष्ट्र के भावी भविष्य का निर्माण करते है। इस नेक योगदान के कारण ही शिक्षक समाज के सबसे ज्यादा सम्मानित सदस्य हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से 27 शिक्षकों का सम्मान करते हुए श्री परमार ने कहा कि यह सम्मान प्रदेश के हर शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हर अधिकारी-कर्मचारी का सम्मान है। श्री परमार ने भोपाल जिले की शिक्षिका श्रीमती वंदना पांडे को मंत्रालय में सम्मानित करते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों के एनआईसी कक्षा से जुड़े शिक्षकों को शाल, श्रीफल, प्रशस्ति-पत्र और 25 हज़ार रुपए की सम्मान राशि से सम्मानित किया।राज्यमंत्री परमार ने सभी शिक्षकों को आचार्य चाणक्य का उदाहरण देते हुए कहा कि आचार्य चाणक्य ने देश को संगठित और विदेशी शक्तियों का नाश कर अखंड भारत का निर्माण किया था। एक बार पुन: शिक्षा के क्षेत्र में भारत का पुनर्निर्माण किया जाना है।
देश के अच्छे नागरिक को विकसित करने के साथ विद्यार्थी के अंदर संवेदनशील व्यक्तित्व का निर्माण करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्री परमार ने सभी शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में भारत को विश्वगुरु बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने का आग्रह भी किया।