taliwan
   Date18-Sep-2021

er1_1  H x W: 0
नई दिल्ली ठ्ठ 17 सितम्बर (वा)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताजिकिस्तान की राजधानी दुशाम्बे में हो रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट को शुक्रवार को वर्चुअली संबोधित किया। श्री मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में कट्टरपंथ पर तीखा प्रहार किया। श्री मोदी ने कहा- मेरा मानना है इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और भरोसे की कमी से संबंधित हैं और इन समस्याओं का मूल कारण बढ़ता हुआ कट्टरपंथ है। अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम ने इस चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है। तालिबान से विश्व में आतंकवाद का खतरा है। इस मुद्दे पर एससीओ को पहल कर कार्य करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि हम इतिहास पर नजर डालें तो पाएंगे कि मध्य एशिया का क्षेत्र मॉडरेट और प्रगतिशील संस्कृति और मूल्यों का गढ़ रहा है। सूफीवाद जैसी परम्पराएं यहां सदियों से पनपीं और पूरे क्षेत्र और विश्व में फैलीं। इनकी छवि हम आज भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत में देख सकते हैं। मध्य एशिया की इस ऐतिहासिक धरोहर के आधार पर एससीओ को कट्टरपंथ और चरमपंथ से लडऩे का साझा टेम्पलेट डेवलप करना चाहिए। श्री मोदी ने ये भी कहा कि भारत में और एससीओ के लगभग सभी देशों में इस्लाम से जुड़ी मॉडरेट, टॉलरेंट और इन्क्लूसिव संस्थाएं और परंपराएं हैं। एससीओ को इनके बीच एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। एससीओ की बीसवीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए मोदी बोले कि ये खुशी की बात है कि हमारे साथ नए मित्र जुड़ रहे हैं। मैं ईरान का स्वागत करता हूं। तीनों नए डायलॉग पार्टनर सऊदी अरब, इजिप्ट और कतर का भी स्वागत करता हूं।