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   Date18-Sep-2021
 
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लखनऊ ठ्ठ 17 सितम्बर (वा)
उत्तरप्रदेश के लखनऊ में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) काउंसिल की 45वीं बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने को लेकर चर्चा हुई। लेकिन छह राज्यों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का विरोध किया। अत: इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
बैठक के बाद देर शाम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। उन्होंने बताया कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में शुक्रवार को कई बड़े फैसले लिए गए। कैंसर मेडिसिन पर जीएसटी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी की गई। रेमडेसिविर और हेपरिन पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगी। कोरोना की दवाइयों पर टैक्स छूट 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कुछ जीवन रक्षक दवाएं जो बहुत महंगी हैं, जो बच्चों के लिए ज्यादा इस्तेमाल की जाती हैं। ये कोरोना से संबंधित नहीं हैं। ऐसी ड्रग्स को जीएसटी से छूट दी गई है। इस पर अब जीएसटी नहीं लगेगी। जोलगेन्स्मा और विल्टेप्सो ऐसी ही 2 महत्वपूर्ण ड्रग्स हैं। बायोडीजल पर जीएसटी घटाकर 5 फीसदी करने को मंजूरी मिली है। मेटल पर जीएसटी 5 से बढ़ाकर 18 फीसदी करने पर भी फैसला हुआ है। इससे पहले पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के नाम पर कई राज्य इसके विरोध में खड़े हो गए थे। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड, छत्तीसगढ़, केरल समेत ज्यादातर राज्यों ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर ही रखने को कहा है। ऐसे में ये प्रस्ताव खारिज हो सकता है।