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   Date17-Sep-2021

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नई दिल्ली ठ्ठ 16 सितम्बर (वा)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेंट्रल विस्टा परियोजना की आलोचना करने वालों को आड़ेहाथों लेते हुए आज कहा कि इन लोगों ने केवल भ्रम फैलाने की कोशिश की और सैकड़ों वर्ष पुराने तथा जर्जर हटमेंट्स एवं बैरकों में काम करने वाले सैन्य अधिकारियों की परेशानियों पर चुप्पी साधे रखी। श्री मोदी ने गुरुवार को यहां रक्षा मंत्रालय के कस्तूरबा गांधी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यू स्थित दो नवनिर्मित कार्यालय परिसरों का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोगों ने केवल भ्रम फैलाने के लिए इस परियोजना का विरोध किया और वास्तविकता तथा जरूरतों को नजरंदाज किया।
उन्होंने कहा कि जो लोग सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे, वे हटमेंट्स पर चुप्पी साधे रहे। वे केवल भ्रम फैला रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनाए गए इन दोनों भवनों को देखकर देश को समझ आ जाएगा कि सरकार किस उद्देश्य को लेकर कार्य कर रही है। पूर्ववर्ती सरकारों को कठघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि इन खस्ताहाल हटमेंट्स की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया और हर कोई इनमें मरम्मत और पेंटिंग आदि कराकर काम चलाता रहा। मीडिया
पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया ने भी कभी इस बारे में नहीं लिखा कि हमारे सैन्य अधिकारी किन परेशानियों और हालातों में जर्जर भवन में काम कर रहे हैं। विपक्षी दलों तथा कुछ संगठनों ने सरकार की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा परियोजना का विरोध करते हुए इसे फिजूलखर्ची करार दिया था और इसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। श्री मोदी ने कहा कि इन भवनों को बनाते समय राजधानी की पहचान, जीवंतता, संस्कृति और पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है। यह आजादी के 75वें वर्ष में राजधानी की आधुनिक जरूरतों तथा आकांक्षाओं को विकसित करने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा- राजधानी केवल शहर नहीं होती। यह देश की सोच, संकल्प, सामथ्र्य और संस्कृति का प्रतीक होती है, जिसके केन्द्र में लोक तथा जनतंत्र होता है। सेंट्रल विस्टा परियोजना के मूल में यही भावना है।
सरकारी तंत्र में कार्य क्षमता तथा दक्षता बढ़ेगी
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से जहां दिल्ली जैसे शहर में संपत्ति और जमीन की बर्बादी बचेगी, वहीं सरकारी तंत्र में कार्य क्षमता तथा दक्षता बढ़ेगी। जो लोग इस परियोजना की आलोचना कर रहे थे और सरकार पर सवाल उठा रहे थे, क्या उन्होंने कभी जर्जर हट्मेंट्स में काम करने वाले सैन्य अधिकारियों की परेशानियों पर सवाल उठाया। ये हटमेंट्स 62 एकड़ भूमि में फैले थे और अब इनकी जगह ये दो कार्यालय परिसर केवल 13 एकड़ भूमि पर बनाए गए हैं तथा ये सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। इससे भूमि का सदुपयोग तो निश्चित हुआ ही है, कर्मचारियों की कार्य क्षमता तथा दक्षता भी बढ़ेगी। यह एक आधुनिक डिफेंस एंकलेव की दिशा में बड़ा कदम है।
सरकार एक नई कार्य संस्कृति लेकर आई
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार एक नई कार्य संस्कृति लेकर आई है और अब हर कार्य को मिशन मोड में किया जा रहा है। इन दो कार्यालयों का निर्माण इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। इनके निर्माण में जहां 24 महीने का समय लगना था, वहीं ये केवल 12 से 13 महीने में तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नीति और नीयत साफ हो, इच्छाशक्ति प्रबल हो और प्रयास ईमानदार हो तो सबकुछ संभव है। उन्होंने कहा कि वह पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि नए संसद भवन के निर्माण का कार्य भी समय से पहले पूरा हो जाएगा।