kanitkar
   Date12-Sep-2021

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देअविवि में आजादी के 75वें अमृत महोत्सव में विद्यार्थियों को देश के लिए दिलाया संकल्प
इंदौर ठ्ठ 11 सितम्बर (स्वदेश समाचार)
आज 11 सितम्बर का दिन हम सबके लिए इसलिए विशेष है, क्योंकि 545 शब्दों का भाषण शिकागो में स्वामी विवेकानंदजी द्वारा दिया गया था, जो भारत के पुनरुत्थान का दिन है। इस देश की प्रतिभा को 80 के दशक तक हमने ऐसी स्थिति में ला दिया था कि जो देश में रहना ही नहीं चाहती थी। विश्व को तो हमने सब कुछ दिया, लेकिन आज सवाल यह है कि हमने देश को क्या दिया? सभी धर्मों का प्रधान देश हमारा देश है, क्योंकि यहां 'सर्वे भवंतु सुखिन:Ó की प्रार्थना करते हैं। विश्व को हर संकट से मुक्ति अगर कोई देश दे सकता है, वह हमारा देश है। हमारा देश सोने की चिडिय़ा नहीं, सोने का गरुड़ था।
उक्त प्रखर विचार शनिवार को देवी अहिल्या विवि इंदौर के तक्षशिला परिसर स्थित श्री अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आजादी के 75वें अमृत महोत्सव को लेकर 'स्वतंत्र भारत का वैश्विक कर्तव्यÓ विषय पर व्याख्यान में मुख्य वक्ता, विचारक एवं भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने रखें।
आजादी के 75 वर्ष पर समुचित सम्मान के लिए मंत्री उषा ठाकुर ने सभी से कार्यक्रम में आग्रह करते हुए कहा कि हर क्रांंतिकारी की प्रतिमा पर प्रार्थना कर हमारे सहयोगी बनें और मध्यप्रदेश के पूरे विभाग मिलकर आजादी के इस महोत्सव को स्वर्णिम बनाने के लिए सामने आएं। कवि श्रीकृष्ण सरल की कविता के माध्यम से मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि मध्यप्रदेश के समस्त विद्यालयों की दीवारों पर महापुरुषों-क्रांतिकारियों के छायाचित्र बनाए जाएंगे, जिससे लाखों विद्यार्थियों से जुड़कर हम सब राष्ट्र के प्रति सराबोर हो जाएंगे। मंत्री श्री सिलावट ने अपनी बात रखते हुए कहा कि राष्ट्र में जब-जब बदलाव आया है, उसकी बुनियाद शिक्षा होती है, क्योंकि भारत देश दुनिया का सबसे युवा देश है। आपने कहा कि इंदौर जब भी कोई कार्य करता है, अद्भुत करता है। भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री कानिटकर के साथ मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, अतिविशिष्ट अतिथि जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, अतिविशिष्ट अतिथि पर्यटन संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर, कुलपति प्रो. रेणु जैन, कुलाधिसचिव डॉ. अशोक शर्मा, कुलसचिव डॉ. अनिल शर्मा, विशिष्ट अतिथि विवि अनुदान आयोग के सचिव डॉ. रजनीश जैन, विशिष्ट अतिथि सांसद शंकर लालवानी, विधायक आकाश विजयवर्गीय उपस्थित रहे। मंच पर कार्य परिषद के सदस्य विश्वास व्यास, अनंत पंवार ने भी उपस्थिति दी।
प्रारंभ में दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण से कार्यक्रम की शुरुआत अतिथिगणों ने की। कुलपति ने स्वागत भाषण में विवि की गतिविधियों की प्रस्तावना एवं जानकारी व्यक्त की, तत्पश्चात आयोग के सचिव डॉ. जैन ने भारतीय शिक्षा नीति पर अपनी बात रखी। इस मौके पर सांसद श्री लालवानी ने प्रधानमंत्री के आह्वान पर आजादी के महोत्सव संबंधी विविध जानकारी देते हुए बताया कि इंदौर ने 750 कार्यक्रम तय किए हैं, जिसके अंतर्गत यह 20वां कार्यक्रम इंदौर में है। कार्यक्रम में अंतिम कड़ी के रूप में शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह द्वारा अतिथि को सम्मानित किया गया। कुलसचिव डॉ. शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
सरलजी बहुत सरल थे-डॉ. मोहन यादव- कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन निवासी राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरलजी इतने सरल थे कि सिर्फ किताब प्रकाशन के लिए अपना सब कुछ बेच दिया था। इसलिए दूसरे का छीनकर जो खाए, ये विकृति है और जो खुद भूखा रहकर दूसरे को खिलाए, ये हमारी भारतीय संस्कृति है। दुनिया हमारी तरफ देख रही है। शिक्षा बांटने की सीख भारत ही सबको दे रहा है।