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   Date12-Sep-2021

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नई दिल्ली ठ्ठ 11 सितम्बर (वा)
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने शनिवार को जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान को किसी भी हालत में अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने देना चाहिए। दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों ने आज यहां पहले मंत्री स्तरीय टू प्लस टू संवाद के दौरान इस बात पर सहमति व्यक्त की।
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ऑस्ट्रेलिया के उनके समकक्ष पीटर दत्तन्न तथा मेरिस पेन ने हिस्सा लिया। दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि अफगानिस्तान को एक बार फिर से आतंकवादियों के लिए पनाहगार नहीं बनना चाहिए। बैठक के बाद श्री जयशंकर ने कहा कि हमने अफगानिस्तान पर विस्तार से चर्चा की है और दोनों देशों के विचार एक समान हैं।
दोनों पक्षों ने कहा कि सभी का फोकस गत 30 अगस्त को अफगानिस्तान के बारे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2593 पर होना चाहिए, इस प्रस्ताव में कहा गया है कि अफगानिस्तान को अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने अफगानिस्तान में महिलाओं और अल्पसंख्यक
समुदायों के साथ व्यवहार को लेकर भी चिंता व्यक्त की। वित्त मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान में मानवीय सहायता के कार्यक्रमों और वहां से वापस आने वाले लोगों के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री ने भी कहां की अफगानिस्तान को एक बार फिर से आतंकवादियों की शरण शास्त्र नहीं बनना चाहिए।भारत और ऑस्ट्रेलिया ने समूचे क्षेत्र में व्यापार के मुक्त प्रवाह, अंतरराष्ट्रीय नियमों तथा कानून के अनुपालन और सतत आर्थिक विकास सुनिश्चित करने पर बल दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि चर्चा के दौरान दोनों पक्षों ने समूचे क्षेत्र में व्यापार के मुक्त प्रवाह, अंतरराष्ट्रीय नियमों तथा कानूनों के अनुपालन और आर्थिक विकास सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया और भारत की साझेदारी खुले, स्वतंत्र, समावेशी और समृद्ध हिंद प्रशांत क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह बैठक दोनों देशों के बीच समग्र सामरिक साझेदारी के महत्व को दिखाती है। श्री सिंह ने कहा कि बैठक में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय और क्षेत्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही रक्षा क्षेत्र में और आतंकवाद तथा महामारी का मुकाबला करने के लिए सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी बातचीत हुई। अफगानिस्तान, हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, विभिन्न मंचों पर सहयोग और अन्य संबंधित मुद्दों पर भी दोनों पक्षों ने विचारों का आदान-प्रदान किया।