jayshankar
   Date27-Aug-2021

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नई दिल्ली ठ्ठ 26 अगस्त (वा)
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि भारत अफगानिस्तान की स्थिति के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ निरंतर बातचीत कर रहा है लेकिन अभी सबसे पहली प्राथमिकता बचे हुए भारतीय नागरिकों को वहां से वापस लाने की है। उधर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से 24 भारतीयों सहित 35 लोगों को लेकर आया वायुसेना का सी 17 ग्लोबमास्टर विमान गुरुवार को गाजियाबाद के हिंडन वायुसेना स्टेशन पर उतरा।
डॉ. जयशंकर ने आज संसदीय सौंध में सभी विपक्षी दलों के संसदीय नेताओं को अफगानिस्तान की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद डॉ. जयशंकर ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार का फोकस अभी वहां से लोगों को लाने पर सबसे ज्यादा है। सरकार सभी भारतीय नागरिकों को अफगानिस्तान से जल्द से जल्द वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके लिए देवी शक्ति ऑपरेशन के तहत छह उड़ान संचालित की गई हैं जिनमें ज्यादातर भारतीयों को वापस लाया गया है लेकिन कुछ अभी भी वहां बचे हुए है । उन्होंने कहा कि सरकार सभी को निश्चित रूप से वापस लाएगी। भारतीय उड़ानों में कुछ अफगानी नागरिकों को भी लाया गया है।
उन्होंने कहा कि साथ ही सरकार की अफगानिस्तान के संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही गतिविधियों तथा निर्णयों पर भी नजर है और इस बात का हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि इन गतिविधियों तथा निर्णयों में भारत की भूमिका का स्थान हो। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल और रूस के राष्ट्रपति पुतिन से टेलीफोन पर बात हुई है। विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने भी कई नेताओं से बात की है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि उन्होंने स्वयं तथा विदेश सचिव ने विपक्षी दलों के नेताओं को अफगानिस्तान की स्थिति की विस्तार से जानकारी दी। विपक्षी नेताओं ने भी अपनी अपनी बात रखी जो मुख्य रूप से वहां से लोगों को वापस लाने के बारे में थी। विपक्षी नेताओं के हर सवाल का सरकार की ओर से संतोषपूर्ण जवाब दिया गया। सरकार के साथ-साथ सभी विपक्षी दल भी यह संदेश देना चाहते हैं कि अफगानिस्तान के संवेदनशील विषय पर हमारे विचार समान हैं। इसके साथ ही यह भी संदेश देना है कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर हमारा मजबूत राष्ट्रीय रूख है और अफगानिस्तान के लोगों के साथ मित्रता हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। जबकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्विट कर कहा था कि वायुसेना के सी-17 विमान ने 35 लोगों के साथ काबुल से भारत के लिए उड़ान भरी है। और यह विमान भारत आ रहा है। उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत संचालित इस उड़ान में 24 भारतीय और 11 नेपाली सवार हैं। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से भारतीय विमानों ने काबुल से छह उड़ानें भरी हैं जिनमें करीब 600 लोगों को वहां से भारत लाया गया है।
तालिबान ने दिखाया पुराना रंग, घर से बाहर निकलने में महिलाओं पर लगाई पाबंदी
काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी हुकूमत जमा ली है। अब पूरी दुनिया के सामने अपना उदार चेहरा दिखाने का प्रयास कर रहा है। लेकिन उसकी कट्टरपंथी मानसिकता उसका पीछा नहीं छोड़ रही है। अब संगठन ने साफ कह दिया है कि उनके देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। साथ ही निर्देश दिए हैं कि औरतें घर से बाहर नहीं निकले। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंगलवार को कहा कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा का खुद ध्यान रखना होगा। इस लिए घर से बाहर नहीं निकले।
तालिबानी बदलते रहते हैं
जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि तालिबानी बदलते हैं। वे प्रशिक्षित भी नहीं होते है। इस लिए ऐसा करना जरूरी है। बता दें 1996 से 2001 के तालिबानी शासन में औरतों के काम करने के लिए बाहर जाने पर प्रतिबंध था। वहीं उन्हें घर पर रहने और बुर्का पहनना पड़ता था। ऐसा नहीं करने पर कट्टरपंथी औरतों और बच्चियों के साथ सारी सीमाएं पार कर देते हैं। इधर वल्र्ड बैंक ने अफगानिस्तान की फंडिंग रोकने का फैसला लिया है। बैंक ने महिलाओं की सुरक्षा का हवाला देते हुए फंडिंग पर रोक लगा दी है।
संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी से मारपीट
वहीं तालिबानी लड़ाकों ने रविवार को काबुल एयरपोर्ट जा रहे अफगानी संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी के साथ मारपीट की। एक अन्य घटना में सोमवार को तीन अज्ञात लोग एक अन्य संयुक्त राष्ट्र कर्मी के घर पहुंचे, वह उस समय अपने काम पर था। तीनों ने संयुक्त राष्ट्र कर्मी के बेटे से उनके बारे में पूछा और उस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान में तैनात अपने 300 विदेशी कर्मचारियों में से लगभग एक तिहाई को कजाखस्तान पहुंचा दिया है।
रूस राष्ट्रपति अफगानिस्तान मामलों में नहीं देंगे दखल
रूस राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि मास्को अफगानिस्तान के घरेलू मामलों में दखल नहीं देगा। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी ने पुतिन के हवाले से बताया कि अफगानिस्तान के घरेलू मामलों में वह स्वाभाविक रूप से हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं। ना उनकी सशस्त्र सेनाएं यहां के आपसी संघर्ष में दखलंदाजी चाहती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे सहयोगी देश कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटि आर्गेनाइजेशन के साथ सक्रियता से सहयोग करेंगे।