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   Date22-Aug-2021

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लखनऊ ठ्ठ 21 अगस्त (ए)
उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं रामभक्त श्री कल्याण सिंह (बाबू जी) नहीं रहे। राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे । उन्हें 4 जुलाई को संजय गांधी पीजीआई के क्रिटिकल केयर मेडिसिन की आईसीयू में गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। लंबी बीमारी और शरीर के कई अंगों के धीरे-धीरे फेल होने के कारण शनिवार रात 9.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। कल्याण सिंह तबीयत खराब होने के कारण लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई में चार जुलाई से भर्ती थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर दिन उनके स्वास्थ्य का हाल लिया और उनके निर्देश पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार निगरानी करते रहे। पीजीआई के डॉक्टरों ने कल्याण सिंह की स्थिति बेहद नाजुक होने की जानकारी मुख्यमंत्री समेत उनके परिवार के लोगों को भी दी थी। शनिवार को देर शाम यह सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ उन्हें देखने एसजीपीजीआइ पहुंचे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंंह के निधन पर शोक जताते हुए उत्तर प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषति किया है।
भाजपा के संस्थापक सदस्यों में थे कल्याण सिंह-भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक कल्याण सिंह का पार्टी के साथ ही भारतीय राजनीति में कद काफी विशाल था। अयोध्या में विवादित ढांचा के विध्वंस के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक थे। राम मंदिर आंदोलन के नायकों में से एक कल्याण सिंह का जन्म छह जनवरी, 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम तेजपाल लोधी और माता का नाम सीता देवी था। कल्याण सिंह ने दो बार उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभाला। अतरौली विधानसभा से जीतने के साथ ही वह बुलंदशहर तथा एटा से लोकसभा सदस्य भी रहे। वह राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे। राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करने के बाद कल्याण सिंह ने लखनऊ में आकर एक बार फिर से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
ढांचा ध्वंस के बाद दे दिया था त्यागपत्र-पहली बार 1991 में कल्याण सिंह उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने और दूसरी बार 1997 में। उनके पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही विवादित ढांचा ध्वंस की घटना घटी थी। अयोध्या में विवादित ढांचा के विध्वंस के बाद उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए छह दिसंबर, 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया।
1993 में बने नेता विपक्ष-कल्याण सिंह 1993 में अतरौली तथा कासगंज से विधायक निर्वाचित हुए। इन चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, लेकिन सरकार न बनने पर कल्याण सिंह विधानसभा में नेता विपक्ष के पद पर बैठे। इसके बाद भाजपा ने बसपा के साथ गठबंधन करके उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई।