कश्मीरियत ने सहिष्णुता को प्रोत्साहित किया - कोविंद
   Date28-Jul-2021

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श्रीनगर द्य 27 जुलाई (वा)
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर की भूमि पर आने वाले लगभग सभी धर्मों ने कश्मीरियत की एक अनूठी विशेषता को अपनाया, जिसने रुढि़वाद को त्याग दिया और समुदायों के बीच सहिष्णुता तथा आपसी स्वीकृति को प्रोत्साहित किया।
श्री कोविंद ने यहां कश्मीर विश्वविद्यालय (केयू) के 19वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा- मैं इस सपने को साकार करने के लिए जम्मू-कश्मीर की युवा पीढ़ी पर पूरी तरह से भरोसा कर रहा हूं, मुझे यकीन है कि ये जल्द से जल्द पूरा होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जम्मू-कश्मीर भारत के ताज के गौरव के रूप में अपना सही स्थान हासिल करने के लिए तैयार है। यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की इस उत्कृष्ट परंपरा को तोड़ दिया गया। हिंसा, जो कभी 'कश्मीरियतÓ का हिस्सा नहीं थी, एक दैनिक वास्तविकता बन गई।यह कश्मीरी संस्कृति के लिए अलग है और इसे केवल एक विचलन कहा जा सकता है। एक अस्थायी, एक बहुत कुछ, एक वायरस की तरह जो शरीर पर हमला करता है और इसे शुद्ध करने की आवश्यकता होती है। अब इस भूमि की खोई हुई महिमा को वापस पाने के लिए एक नई शुरुआत और दृढ़ प्रयास किया जा रहा है।
सभी मतभेदों को समेटने की क्षमता है लोकतंत्र में - राष्ट्रपति ने कहा- मेरा दृढ़ विश्वास है कि लोकतंत्र में सभी मतभेदों को समेटने की क्षमता है और नागरिकों की सर्वोत्तम क्षमता को बाहर लाने की ताकत भी है। कश्मीर खुशी से पहले से ही इस दृष्टि को साकार कर रहा है।
आपको अपना भविष्य खुद बनाने देता है लोकतंत्र - उन्होंने कहा- लोकतंत्र आपको अपना भविष्य खुद बनाने देता है, एक शांतिपूर्ण और समृद्ध कल। इसमें विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं का बड़ा योगदान है और मुझे यकीन है कि वे जीवन और कश्मीर के पुनर्निर्माण के इस अवसर को नहीं जाने देंगे।
पूरा भारत आपको प्रेरणा और गर्व से देख रहा - उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कश्मीर एक नए पत्ते के रूप में बदल रहा है, रोमांचक नई संभावनाएं खुल रही हैं। पूरा भारत आपको प्रेरणा और गर्व से देख रहा है। कश्मीरी युवा सिविल सेवा परीक्षा से लेकर खेल और उद्यमशीलता के उपक्रमों तक, विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।