लोकतंत्र हमारे खून में
   Date22-Jul-2021

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एनआरसी-सीएए से देश में मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं- डॉ. भागवत
गुवाहाटी ठ्ठ 21 जुलाई (वा)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मा. डॉ. मोहनराव भागवत ने बुधवार को कहा कि देश में लोगों का एक वर्ग राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के मुद्दे पर मुसलमानों को भ्रमित कर राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहता है। इससे देश में किसी भी मुसलमान को कोई नुकसान नहीं होगा। लोकतंत्र हमारे खून में शामिल है। यह परंपराएं सदियों से हमारे देश में मौजूद हैं।
डॉ. भागवत ने यहां 'सिटिजनशिप डिबेट ओवर एनआरसी एंड सीएए-असम एंड द पॉलिटिक्स ऑफ हिस्ट्रीÓ पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान कहा कि सीएए और एनआरसी का हिंदू-मुसलमान विभाजन से कुछ लेना-देना नहीं है और कुछ लोग अपने राजनीतिक हित के लिए दोनों मुद्दों को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस नागरिकता कानून की वजह से देश में किसी भी मुसलमान को कोई नुकसान नहीं होगा। डॉ. भागवत ने जोर देकर कहा कि सीएए से किसी मुसलमान को कोई दिक्कत नहीं होगी। सीएए और एनआरसी का हिंदू-मुस्लिम विभाजन से कोई लेना-देना नहीं है। राजनीतिक लाभ के लिए इसे साम्प्रदायिक रूप दिया गया है।
सरसंघचालक ने विमोचन के बाद कहा स्वतंत्रता के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि अल्पसंख्यकों का ख्याल रखा जाएगा। हम ऐसा करना जारी रखेंगे। सीएए के कारण किसी भी मुसलमान को कोई नुकसान नहीं होगा। डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा है कि देश विभाजन के समय यह आश्वासन दिया गया था कि हम अपने देश में अल्पसंख्यकों का ख्याल रखेंगे और आज तक देश में इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है। देश में अल्पसंख्यकों को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है और ना ही उनके अधिकारों का हनन हुआ है, जबकि पाकिस्तान ने अपने देश के अल्पसंख्यकों के साथ ऐसा नहीं किया। डॉ. भागवत ने कहा कि हमें दुनिया से धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और लोकतंत्र की सीख लेने की कोई जरूरत नहीं है। धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और लोकतंत्र हमारी परंपरा का हिस्सा है। डॉ. भागवत ने कहा कि लोकतंत्र हमारे खून में शामिल है। यह परंपराएं सदियों से हमारे देश में मौजूद हैं। इन्हें हमारे देश में लागू किया गया और हमने इन परंपराओं पोषण किया और उन्हें जीवित रखा है। डॉ. भागवत मंगलवार शाम दो दिन की यात्रा पर असम पहुंचे। संघ पदाधिकारी ने बताया कि डॉ. भागवत ने असम के विभिन्न क्षेत्रों और अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर एवं त्रिपुरा जैसे अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठकें की। उन्होंने कहा कि इन बैठकों में संगठन से जुड़े विषयों एवं महामारी के दौर में समाज और लोगों के कल्याण के उपायों पर चर्चा हुई।
सीएए और एनआरसी क्या है ?- सीएए यानी नागरिकता संशोधन कानून 2019 ( सिटिजन अमेंडमेंट एक्ट) के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, क्रिश्चियन और पारसी धर्म के लोगों को नागरिकता देने की आसान प्रक्रिया है। पहले नागरिकता हासिल करने के लिए देश में 11 वर्षों तक रहना अनिवार्य था लेकिन अब उस अवधि को एक वर्ष से छह वर्ष कर दिया गया है।