स्वर्ग से बड़ा ज्ञान
   Date10-Jul-2021

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प्रेरणादीप
कहा गया है-'विद्ययाऽमृतमश्नुते।Ó इसके समक्ष सारे संसार का वैभव यहां तक कि स्वर्ग का आनंद भी तुच्छ है। भरद्वाज मुनि जीवनभर तपस्या में निरत रहे। मरते समय देवदूत लेने आए तो उन्होंने अनुरोध किया-'मुझे इसी लोक में जन्मने दिया जाए। स्वर्ग जाकर क्या करूंगा।Ó देवदूतों ने आश्चर्य से पूछा-'तप का लक्ष्य स्वर्ग होता है, सो आपको मिल चुका। तब तप किसलिए?Ó भरद्वाज जी ने कहा-'ज्ञान संचय के लिए। पूर्ण सत्य तक पहुंचने के लिए अभी विद्या की संपदा मेरे पास न के बराबर है। उसके लिए अभी मैं और भी तप करना चाहता हूं। स्वर्ग से ज्ञान बड़ा है। स्वर्ग से सुविधा और ज्ञान से आनंद मिलता है।Ó