अटल व नर्मदा एक्सप्रेस-वे के निर्माण से विकास को मिलेगी गति
   Date03-Jun-2021

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भोपाल द्य 2 जून (वा)
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के लगभग 17 जिलों से निकलने वाले नर्मदा एक्सप्रेस-वे और ग्वालियर-चंबल संभाग में विकसित होने वाले अटल प्रोग्रेस-वे के कार्य को युद्ध स्तर पर पूर्ण किया जाए। प्रदेश के औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा नए नगरीय क्षेत्रों के विकास के लिए यह दोनों परियोजनाएं दूरगामी निवेश हैं। यह परियोजनाएं प्रदेश की प्रगति को नए आयाम देंगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान मंत्रालय में नर्मदा एक्सप्रेस-वे और अटल प्रोगेस-वे की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में लोक निर्माण मंत्री श्री गोपाल भार्गव वर्चुअली सम्मिलित हुए। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव श्री संजय शुक्ला तथा श्री नीरज मंडलोई तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
अधिक से अधिक शासकीय भूमि का उपयोग हो - मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि दोनों ही परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही को तेजी से पूर्ण किया जाए। प्रयास यह हो कि परियोजना निर्माण में अधिक से अधिक शासकीय भूमि का उपयोग हो। निजी भूमि अधिग्रहण में भूमि के बदले भूमि देने के विकल्प पर प्राथमिकता से कार्य करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अटल प्रोगेस-वे के निर्माण में घडिय़ाल अभयारण्य को सुरक्षित रखा जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि दोनों परियोजनाएं शीघ्र पूर्ण करने के लिए भारत सरकार के स्तर पर वे संबंधित मंत्रियों से संवाद करेंगे।
ग्वालियर-चंबल का औद्योगिक पोटेंशियल बढ़ रहा है - अटल प्रोग्रेस-वे भिंड, मुरैना तथा श्योपुर जिले से गुजरेगा। यह क्षेत्र दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस- वे, ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर, आगरा-कानपुर हाईवे के मध्य स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह क्षेत्र उत्कृष्ट औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। दिल्ली तथा आसपास के राज्यों में बन रही परिस्थितियों के परिणाम स्वरूप इस क्षेत्र का औद्योगिक पोटेंशियल बढ़ रहा है। भिंड में लॉजिस्टिक हब, मुरैना में मल्टी प्रोडेक्ट औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने और श्योपुर में कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की योजना है।
6742 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा अटल प्रोग्रेस-वे - अटल प्रोग्रेस-वे की अनुमानित लागत 6 हजार 742 करोड़ रुपए है। कुल 312 किलोमीटर लम्बा यह मार्ग श्योपुर, भिंड और मुरैना के 153 गांव से गुजरेगा। इस परियोजना के लिए 3 हजार 55 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। परियोजना के अंतर्गत 7 पुल और दो आर.ओ.बी. का निर्माण प्रस्तावित है।