गांव सुरक्षित तो शहर सुखी...
   Date04-May-2021

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विशेष टिप्पणी
शक्तिसिंह परमार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर पुरस्कार समारोह के दौरान ग्राम पंचायतों से आह्वान किया था कि 'कोरोनाÓ को किसी भी सूरत में गांव तक नहीं पहुंचने देना है..,इस आह्वान से जुड़ी जिम्मेदारी और चेतावनी को प्रत्येक राज्य सरकार और ग्राम पंचायत गंभीरता से समझ लें...क्योंकि गांव बचेंगे तो ही शहर आबाद रहेंगे...प्रधानमंत्री कोरोना महामारी में गांव की व्यवस्था और संसाधनों के मान से इस गंभीर बिंदु को समझ चुके हैं..,तभी तो उन्होंने कोरोना से गांवों को बचाने की बात कही है...क्योंकि हमारे देश की प्रगति और संस्कृति का नेतृत्व गांवों ने ही किया है...आधुनिक भारत में गांव समर्थ हों..,आत्मनिर्भर हों...इसके लिए जरूरी है कि वे बीमारी, महामारी से भी मुक्त हों...कोरोना की पहली दहशत गांवों को भले ही प्रभावित नहीं कर सकी हो..,लेकिन दूसरी लहर में गांवों में भी स्थिति डांवाडोल होने लगी है...क्योंकि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा आधुनिक संसाधनों एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित है...इसलिए सिर्फ राज्य सरकारों या प्रशासनिक तंत्र की नहीं..,ग्राम मुखिया से लेकर प्रत्येक ग्रामवासी की जिम्मेदारी है कि कोरोना के खिलाफ कोविड नियमों का मानव जीवन बचाने के लिए सख्ती से पालन हो...ग्रामीण क्षेत्रों में रहवासी सरंचना एवं आबादी का मेलजोल शहरों से भिन्न होता है...एक-दूसरे के सुख-दु:ख में साथ होने की परंपरागत भारतीय संस्कृति है...इसलिए शहरों की तुलना में गांवों में अगर कोरोना संक्रमण पहुंचता है तो उसके प्रसार की गति शहरों से भी वीभत्स होने से इनकार नहीं किया जा सकता..? अगर आज मप्र के प्रत्येक गांव में कोरोना संक्रमण की दस्तक है...उप्र की हर ग्राम पंचायत में कोरोना संक्रमित निकल रहे हैं तो इस भयावह खतरे को नियंत्रित करना केवल किसी सरकार के वश की बात नहीं..,इसके लिए प्रत्येक ग्रामवासी और सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों से जुड़े संगठनों को आगे आना होगा...रा.स्व.संघ का सेवा भारती संगठन इस दिशा में हर स्तर पर प्रयासरत है...गांवों में कोरोना का खतरा अभी अदृश्य स्थिति में है..,जून-जुलाई के बाद अगर कोरोना नई पीक पर आता है तो इससे सर्वाधिक प्रभावित होने वाली आबादी ग्रामीण होगी...क्योंकि मौसम की मार के साथ कोरोना विकराल रूप ले सकता है...अत: गांव को महामारी से बचाने के लिए सतर्कता के साथ संकल्प की वचनबद्धता जरूरी है..,क्योंकि गांव सुरक्षित रहेंगे, तभी तो शहर सुखी होंगे..