सामूहिक प्रयास से मिलेगी जीत
   Date16-May-2021

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हम जीतेंगे 'पॉजिटिविटी अनलिमिटेडÓ के समापन पर सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा-
नई दिल्ली ठ्ठ 15 मई (विप्र)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने शनिवार को कहा कि दृढ़ संकल्प, सतत प्रयास व धैर्य के साथ भारतीय समाज कोरोना पर निश्चित ही विजय प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि यह समय गुण-दोषों के बारे में चर्चा करने का नहीं है, बल्कि इस समय समाज के सभी वर्गों को एक साथ मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे, ताकि इस संकट से हम पार पा सकें।
उक्त विचार डॉ. भागवत ने 'हम जीतेंगे- पॉजिटिविटी अनलिमिटेडÓ व्याख्यानमाला के पांचवें व अंतिम दिन अपने समापन उद्बोधन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सब लोग परस्पर एक टीम बनकर काम करेंगे तो सामूहिकता के बल पर हम अपनी और समाज की गति बढ़ा सकते हैं। इस समय अपने सारे मतभेद भुलाकर हमें एक साथ मिलकर काम करना होगा। डॉ. भागवत ने कोरोना के हालात पर चर्चा करने के साथ ही कहा कि सफलता और असफलता अंतिम नहीं है। काम जारी रखने का साहस मायने रखता है।
अभी अपने आपको संभालने का वक्त है-अभी सकारात्मकता पर बात करना बहुत कठिन है, क्योंकि समय बहुत कठिन चल रहा है। अनेक परिवारों में कोई अपने, कोई आत्मीय बिछड़ गए हैं। अनेक परिवारों में तो भरण-पोषण करने वाला ही चला गया। 10 दिन में जो था, वह नहीं था हो गया। अपनों के जाने का दु:ख और भविष्य में खड़ी होने वाली समस्याओं की चिंता, ऐसी दुविधा में तो परामर्श देने के बजाय पहले सांत्वना देना चाहिए। यह सांत्वना के परे दु:ख है। इसमें तो अपने आपको ही संभालना पड़ता है। मन थक गया तो सांप के सामने चूहे जैसी स्थिति हो जाएगी-सबसे पहले बात मन की है। मन अगर हमारा थक गया, हार गया तो सांप के सामने चूहे जैसा हो जाता है, अपने बचाव के लिए कुछ करता नहीं, ऐसी हमारी स्थिति हो जाएगी। हमें ऐसी स्थिति नहीं होने देनी है। हम कर रहे हैं। जितना दु:ख है, उतनी ही आशा है। समाज पर संकट है। यह निराशा की परिस्थिति नहीं है। लडऩे की परिस्थिति है। क्या ये निराशा, रोज 10-5 अपरिचित लोगों के जाने के समाचार सुनना, मीडिया के माध्यम से परिस्थिति बहुत विकराल है, इसका घोष सुनना, ये हमारे मन को कटु बनाएगा। ऐसा होने से विनाश ही होगा। ऐसी मुश्किलों को लांघकर मानवता आगे बढ़ी है।
हमें मिलकर काम करना है-सारे भेद भूलकर, गुण-दोष की चर्चा छोड़कर सभी को मिलकर काम करना है। देर से जागे तो कोई बात नहीं। सामूहिकता के बल पर हम अपनी गति बढ़ाकर आगे निकल सकते हैं। निकलना चाहिए। कैसे करना है। पहले अपने को ठीक रखें। इसके लिए जरूरी है- संकल्प की मजबूती। दूसरी बात है सजग रहना। सजग रहकर ही अच्छा बचाव हो सकता है। शुद्ध आहार लेना जरूरी है, लेकिन इसकी सही जानकारी लेना है। कोई कहता है, इसलिए नहीं मान लेना है। अपना अनुभव और उसके पीछे के वैज्ञानिक तर्क की परीक्षा करना चाहिए। हमारी तरफ से कोई बेसिर-पैर की बात समाज में न जाए। समाज में चल रही है तो हम बलि न बनें।
यह हमारे धैर्य की परीक्षा है-आने वाली परिस्थिति की चर्चा हो रही है, यह पैनिक क्रिएट करने के लिए नहीं है। वह तो आगाह किया जा रहा है तैयारी के लिए। नियम के साथ चलें। ऐसा हम करेंगे तो आगे बढ़ेंगे। कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, ऐसा देश है हमारा। कठिन जंग लडऩी होगी। जीतनी होगी। जो परिस्थिति आई है, यह हमारे सद्गुणों की परख करेगी। हमारे दोषों को भी दिखा देगी। दोषों को दूर करके, सद्गुणों को बढ़ाकर यह परिस्थिति ही हमें प्रशिक्षित करेगी। यह हमारे धैर्य की परीक्षा है। याद रखिए यश-अपयश का खेल चलते रहता है।