हम जीतेंगे 'पॉजिटिविटी अनलिमिटेड' संकट पर विजय के लिए करुणा, सेवा व सकारात्मकता को बनाएं हथियार
   Date13-May-2021

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नई दिल्ली ठ्ठ 12 मई (विप्र)
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री निवेदिता भिड़े, विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी व प्रसिद्ध उद्योगपति व अब सामाजिक कार्यों में सक्रिय अजीम प्रेमजी ने भारतीय समाज से आव्हान किया कि कोरोना संकट का एकजुट होकर मुकाबला करें तथा करूणा व सेवा पर अपना ध्यान केंद्रित करें। हम जीतेंगे -'पॉजिटिविटी अनलिमिटेडÓ ( क्कशह्यद्बह्लद्ब1द्बह्ल4 ठ्ठद्यद्बद्वद्बह्लद्गस्र') श्रृंखला के दूसरे दिन संबोधित कर रहे थे। व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन दिल्ली स्थित कोविड रिस्पॉन्स टीम द्वारा किया गया है। द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक व आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा मानसिक रूप से, सामाजिक रूप से हम सबके ऊपर एक जिम्मेदारी है। उस जिम्मेदारी को निभाने के लिए हमें सबसे पहले क्या करना है, हमारे भीतर की जो धैर्य है, शौर्य है, जोश है, अपने जोश को जगाएं। जोश को जगाने से उदासीपन अपने आप हट जाएगा। उन्होंने कहा करूणा की कब आवश्यकता है? जब व्यक्ति उदास है, दु:खी है, दर्द से पीडि़त है। यहां करूणा अपने भीतर जगाएं। करूणा जगाने का मतलब ये है कि हम सेवा कार्य में लग जाएं। अपने से जो हो सकता है, वो सेवा हम दूसरों की करें...ऐसे ही ये मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा है। कम से कम इस वक्त हम सबको ईश्वर भक्ति को हमारे भीतर जगाना है। ये जान कर हमको आगे बढऩा है कि ईश्वर है और वो हमको बल देंगे, और दे रहे हैं। व्याख्यानमाला का प्रसारण 100 से अधिक मीडिया प्लेटफॉर्म पर 11 से 15 मई तक प्रतिदिन सायं 4.30 बजे किया जा रहा है। 13 मई को इस श्रृंखला के अंतर्गत पूज्यनीय शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वतीजी व प्रख्यात कलाकार पद्मविभूषण सोनल मानसिंहजी अपना उद्बोधन देंगे।
श्री श्री रविशंकरजी के सम्बोधन की मुख्य बातें-
ह्व हर व्यक्ति को अपने अंदर हिम्मत और धैर्य रखना है और धैर्य के द्वारा अपने अंदर का जोश जगाना है जिसके जिसके कारण हमारे भीतर की उदासी दूर हो जाएगी।
ह्व हम सबको अपना होश संभाल कर रखना है। भावुकता से दूर रहें, भावुक ना हो इससे जीवन का अफसोस कम होगा।
ह्व हमें अपने भीतर करुणा को जगाना है। जब आप उदास एवं दुखी हो तो अपने अंदर की करुणा को बढ़ाएं दूसरों की सेवा करें सेवा से मनोबल बढ़ेगा।
ह्व हम सब नियम का पालन करें, प्राणायाम करें, ध्यान लगाएं, मंत्रोच्चारण करें, भगवान में मन लगाएं, क्योंकि यह परीक्षा की घड़ी है, निर्बल के बलवान बने, ईश्वर में विश्वास रखने से मानसिक तनाव दूर होता है, योग करें क्योंकि योग हमारे भीतर दुख को आने नहीं देता और जो पहले से ही दुख विद्यमान हैं उसे भगाता है, अपने खाने में ध्यान रखें योग और आयुर्वेद ले जिससे कोरोना से बचाव हो सके।
ह्व नकारात्मकता से बचें नकारात्मक वातावरण से दूर रहें अपने आप को सकारात्मक काम से जोड़े रखने इससे और वातावरण हल्का रखें।