विभाजन की मानसिकता अनुचित- डॉ. कृष्ण गोपाल
   Date06-Apr-2021
 
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नई दिल्ली। रा.स्व.संघ के सहसरकार्यवाह श्री कृष्ण गोपाल एवं वरिष्ठ प्रचारक श्री इंद्रेश कुमार ने नई दिल्ली में सोमवार को किताब मुस्तकिल का भारत 'भविष्य का भारतÓ पुस्तक के उर्दू संस्करण का विमोचन किया।
डॉ. भागवत की उर्दू में अनुवादित पुस्तक विमोचित
नई दिल्ली ठ्ठ 5 अप्रैल (ए)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने देश के लोगों के बीच विभाजन की मानसिकता को अनुचित करार देते हुए कहा है कि जिन लोगों की देश के प्रति निष्ठा, अनुशासन, सम्मान और आस्था है, वे सब एक समान हैं और विभिन्न विचारों एवं पद्धतियों के प्रति स्वीकार्यता ही भारत की असली पहचान है।
डॉ. गोपाल ने सोमवार को यहां सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत की पुस्तक 'भविष्य का भारत ' के उर्दू संस्करण मुस्तकबिल का भारत के विमोचन समारोह में कहा कि देशवासियों के बीच विभाजन की मानसिकता अनुचित है। जिन लोगों की देश के प्रति निष्ठा है और आस्था है, वे सब एक हैं। भारत के विभिन्न भागों में बसने वाले तमाम पंथ और भाषाओं के लोगों के विचारों और पद्धतियों के प्रति परस्पर सम्मान और स्वीकार्यता जरूरी है और यही भारत की पहचान है। उन्होंने कहा कि संघ देश के तमाम मुस्लिम बंधुओं को आमंत्रित करता है कि वे संघ के विरुद्ध फैलाई गई भ्रांतियों से गुमराह होने के बजाय अपने प्रश्न सामने रखकर शंकाएँ दूर करें। उन्होंने लोगों को संघ के पास आकर उसे समझने और अपने प्रश्नों को हल करने की अपील करते हुए कहा कि संवाद के माध्यम से ही किसी भी आशंका का समाधान संभव है।
उन्होंने कहा कि सरसंघचालक डॉ. भागवत की इस पुस्तक के जरिए संघ के प्रति फैलायी गई भ्रांतियों और शंकाओं के समाधान के प्रयास किए गए हैं। देश के विभिन्न वर्गों और सम्प्रदायों के लोगों के बीच एक-दूसरे के प्रति भ्रांतियां रखना उचित नहीं और समाज में दूरी रहने से देश एकजुट नहीं रह सकता।
डॉ कृष्णगोपाल ने कहा कि हिंदुत्व का भारतीय दर्शन सभी के बीच परस्पर समन्वय, सम्मान और स्वीकार्यता में विश्वास करता है। देश-दुनिया के जितने भी पंथ हैं अगर वे सबके मंगल और सुख की कामना करते हैं तो वे भी हिंदुत्व के दर्शन को बढ़ाने में ही योगदान देते हैं।