देशमुख पर गिरी गाज
   Date06-Apr-2021

cv3_1  H x W: 0
100 करोड़ की वसूली के आरोप में गई गृहमंत्री की कुर्सी, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सौंपा इस्तीफा
मुंबई ठ्ठ 5 अप्रैल (ए)
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के पिछले दिनों महाराष्ट्र के गृहमंत्री पर लगाए गए 100 करोड़ रुपए की वसूली के सनसनीखेज आरोप के बाद अनिल देशमुख पर गाज गिर गई है। अनिल देशमुख ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा एनसीपी प्रमुख शरद पवार के घर पर हुई बैठक के बाद दिया। माना भी जा रहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सोमवार को दिए गए आदेश के बाद अनिल देशमुख से इस्तीफा लिया जा सकता है। देशमुख ने सोमवार दोपहर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद अनिल देशमुख ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की और अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई। इसके बाद, शरद पवार ने भी सहमति दे दी।
निष्पक्ष जांच की मांग
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि देशमुख ने अपने इस्तीफे में जिक्र किया है कि वह नैतिक आधार पर पद से त्यागपत्र दे रहे हैं, लेकिन इस पूरे प्रकरण में उद्धव ठाकरे की चुप्पी कई सवाल उठाती है। मुख्यमंत्रीजी आपकी कोई नैतिकता है कि नहीं? आपकी नैतिकता कहा हैं? क्या हम आपकी नैतिकता के बारे में सुनेंगे। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे शासन करने के नैतिक अधिकार से अब वंचित हो गए हैं। रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि शरद पवार जी देश के एक वरिष्ठ राजनेता हैं। उन्हें अनिल देशमुख को पूरी तरह से क्लीन चिट देने के निहितार्थ को समझना चाहिए। यह मामला बेहद गंभीर है।
और उद्धव ठाकरे की सरकार दो मोर्चों पर फंसी हुई है। पहला सचिन वाझे प्रकरण और दूसरा उगाही प्रकरण... इन प्रकरणों के पूरे तार को जोड़ा जाए तो यह एक बड़े लूट के षड्यंत्र की ओर इशारा करता है। इस पूरे मामले के सभी पहलुओं की निष्?पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि कौन किसको प्रश्रय दे रहा था।
खामोश क्यों हैं उद्धव ठाकरे
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडनवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख का इस्तीफा तभी हो जाना चाहिए था, जिस समय उन पर आरोप लगे थे। उच्च न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप किया उसके बाद गृह मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है। सबसे बड़ी बात यह कि इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे खामोश क्यों हैं?