निष्पक्ष व पारदर्शी बने विश्व स्वास्थ्य संगठन...
   Date04-Apr-2021

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ब्रेक
के बाद
शक्तिसिंह परमार
कि सी भी समाज-राष्ट्र की समस्याओं का समाधान एक जिम्मेदार, निष्पक्ष और पारदर्शी सरकार, संस्था अथवा संगठन के जरिये ही संभव है... क्योंकि उसके लिए पूरा राष्ट्र ही एक परिवार होता है... ठीक इसी तरह से वैश्विक मानचित्र पर विश्व की तमाम समस्याओं, ज्वलंत मुद्दों एवं समसामयिक आपदाओं-संकटों से लडऩे की एक संयुक्त रणनीति वह अंतरराष्ट्रीय संस्था व संगठन बनाती है... जो कि सर्वे भवन्तु सुखिन: के साथ पूरे विश्व को एक परिवार इकाई के रूप में मानकर सबको समान अवसर प्रदान करने का हर संभव प्रयास करती है...व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक राष्ट्र अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए जी-तोड़ कोशिश करता है... लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां भी रहती हैं, जब उसे अंतरराष्ट्रीय मंच की तरफ देखने और उससे सहायता-सुझाव की आशा होती है... इसी बात को ध्यान में रखकर विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र संघ, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष, विश्व मौसम विज्ञान संगठन, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संगठन, विश्व आर्थिक मंच, अंतरराष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन, अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जैसे अनेक संगठन कार्यरत हैं, जो कि मानव जीवन, पर्यावरण, सुरक्षा, आतंकवाद, मानव विकास व सबको भोजन जैसे मुद्दों पर लगातार विश्व को एक मंच पर लाकर समाधान का रास्ता खोजते हैं... आर्थिक एवं सामाजिक परिषद विश्व की जनसंख्या के जीवन में सुधार हेतु, गरीबी दूर करने, अशिक्षा को मिटाने, भूख और कुपोषण से मुक्ति, अपराध मुक्ति, अंतरराष्ट्रीय शांति बहाली हेतु अंतरराष्ट्रीय मामलों में आर्थिक समानता से शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर निरंतर काम करती है... विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इसी का एक अंग है...जो विश्व में स्वास्थ्य एवं जीवनरक्षा के लिए जवाबदेह है... डब्ल्यूएचओ की भूमिका को लेकर कोरोनाकाल के इस वर्षभर के विकट संकट में अनेक सवाल भी खड़े किए और इसमें सुधार के साथ ही इसके ढांचे को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की आवश्यकता को भी मजबूती के साथ रेखांकित किया है...विश्व की तमाम स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानव स्वास्थ्य संबंधी विकास के लिए 7 अप्रैल 1948 को 194 सदस्य देशों एवं 2 संबद्ध देशों ने डब्ल्यूएचओ की स्थापना की थी... इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में है... जिसका मुख्य उद्देश्य विश्व के स्वास्थ्य स्तर को ऊंचा करना है... यानी हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा की सुलभ पहुंच डब्ल्यूएचओ का मूल मंत्र है...
वैश्विक महामारी कोरोना के विकट संकट ने डब्ल्यूएचओ की भूमिका पर अनेक तरह की तीर्यक रेखाएं खींचने का काम किया... तभी तो सदस्य देशों का एक बड़ा धड़ा कोरोना महामारी में डब्ल्यूएचओ की भूमिका को ही सवालों के घेरे में खड़ा करता नजर आया... प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी गत मई में अंतरराष्ट्रीय मंच से डब्ल्यूएचओ में सुधार, पारदर्शी और जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया था... डब्ल्यूएचओ के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि 18-19 मई 2020 को जिनेवा में टेली कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा विश्व स्वास्थ्य एसेंबली का आयोजन हुआ... क्योंकि तब तक विश्व में करीब 50 लाख लोग कोरोना वायरस से संक्रमित होने के साथ 3 लाख लोग कोरोना से कालकवलित हो चुके थे... ऐसे में अमेरिका के साथ ही अन्य देशों के निशाने पर डब्ल्यूएचओ को आना ही था... एसेंबली के वर्चुअल सत्र में डब्ल्यूएचओ के सदस्य देशों ने कोविड-19 से निपटने में डब्ल्यूएचओ के प्रदर्शन का स्वतंत्र व निष्पक्ष मूल्यांकन पर एकमत एक स्वर में मुहर लगाई थी... यह तय हुआ था कि कोरोना से निपटने में डब्ल्यूएचओ के प्रयासों की व्यापक जांच होगी... इस प्रस्ताव का 140 देशों ने समर्थन किया था... जिसमें आश्चर्यजनक, किन्तु सत्य है कि इसमें चीन भी शामिल था... जबकि डब्ल्यूएचओ की चीनपरस्ती और उसके चीनी चंगुल में फंसे रहने की भूमिका को ही जांचना था... अब 2021 में डब्ल्यूएचओ 17 चीनी और 17 ही अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का समूह बनाकर 14 दिनों की जांच करके 120 पन्नों की रिपोर्ट में चीन को कोरोना वायरस निर्मित करने वाले आरोपों के मामलों से क्लीन चिट दे चुका है... तो क्या यह समझा जाए कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मामलों में हर किसी के हाथ बंधे होते हैं... वे भविष्य में भी प्रत्यक्ष युद्ध लडऩे के बजाय जैविक-रासायनिक हथियार का उपयोग करने अर्थात् महामारियों को ही हथियार बनाकर अपना उल्लू सीधा करते रहेंगे... क्योंकि अनेक विकसित देशों के लिए महामारियां बाजार खड़ा करती हंै, अवसर लेकर आती हैं... यानी कोरोना विषाणु की उत्पत्ति के रहस्य पर परदा डालने वाला डब्ल्यूएचओ पुन: चीन की ही पैरवी करता नजर आ रहा है...
भारत ने डब्ल्यूएचओ के अनुभवों, प्रयासों एवं दिशा-निर्देशों को ध्यान रख उसके समानांतर अपने प्रयासों को कोरोना महामारी के खिलाफ आगे बढ़ाया है... जैसे भारत में कोरोना संक्रमण का सबसे पहला मामला 30 जनवरी 2020 को सामने आया था... ठीक अगले दिन 31 जनवरी 2020 को डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस को वैश्विक चिंता की अंतरराष्ट्रीय आपदा घोषित किया था... 11 मार्च 2020 को डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को वैश्विक महामारी घोषित किया, तो ठीक अगले दिन 12 मार्च को भारत में कोरोना संक्रमण से पहली मौत की पुष्टि हुई... कुछ दिनों बाद भारत के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की पहचान में सफलता पाई... 17 मार्च को भारत ने निजी लेब में वायरस टेस्ट की अनुमति प्रदान की... तो 22 मार्च को जनता कफ्र्यू और 25 मार्च को आधी रात से 21 दिन की संपूर्ण तालाबंदी भारत में लागू की गई... कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था, मजदूर, नौकरीपेशा हर मोर्चे पर संकटों से लड़ते हुए भारत ने कोरोना जांच का दायरा बढ़ाकर महामारी को विकराल होने से लडऩे में सफलता पाई... कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने देश-दुनिया को अनेक तरह के सबक सिखाए हैं... और भविष्य के मान से ऐसी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महामारियों के विकट संकटकाल में क्या सावधानियां-सतर्कता बरतना होंगी..? उसमें सरकार, समाज, विज्ञान, तकनीक और संसाधनों का कैसा सदुपयोग होगा..? सबकुछ कोरोना हमें सिखा रहा है... तभी तो भारत स्वयं विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू करने के पहले अनेक देशों को मुफ्त टीका उपलब्ध करवाता है... ऐसी स्थितियों में डब्ल्यूएचओ का मौन अखरता है... कोरोना महामारी का संकट अभी टला नहीं है... यूरोपीय देशों और अमेरिका की कोरोना के कारण हुई मानव हानि ने हमें यह ज्ञात कराया कि यह वायरस विशेष संरचना अर्थात् पैटर्न पर चल रहा है... अगर इसके खिलाफ लड़ाई में रत्तीभर ढील दी जाए तो यह दोगुनी ताकत से आक्रामक हमलावर की भांति लौटता है... ऐसे ही लक्षण अब भारत में कोरोना की दूसरी लहर में दिखाई दे रहे हैं... घातक वायरस कोरोना के खिलाफ समाधान 'बॉयोसाइंसÓ में खोजे-देखे जा रहे हैं... बॉयोमेडिकल प्रयासों से भी इस विकट संकट से पार पाने की रणनीति पर आगे बढ़ा जा रहा है... लेकिन सामाजिक नजरिया अर्थात किसी भी देश के नागरिकों के ईमानदार सामूहिक प्रयास ही इस वीभत्स संकट का समाधान है... क्योंकि विश्व के साथ हम भी अभी महामारी के बीच ही खड़े हैं... जब तक संक्रमण का अंतिम मामला समाप्त नहीं होता, तब तक विश्व को एकजुट रहकर कोरोना के खिलाफ अभियान छेड़े रखना होगा... इसमें डब्ल्यूएचओ की निष्पक्ष व पारदर्शी भूमिका अतिआवश्यक है...