हम मूकदर्शक नहीं बने रह सकते
   Date28-Apr-2021

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नई दिल्ली द्य 27 अप्रैल
कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते केसों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर कड़ी टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस संकट के दौर में हम मूकदर्शक बने नहीं रह सकते। अदालत ने कहा कि सरकार को यह बताना होगा कि कोरोना संकट से निपटने के लिए उसका क्या प्लान है। जस्टिस एस.आर. भट ने कहा- मैं दो मुद्दे उठाना चाहता हूं, जो केंद्र सरकार के अंतर्गत हैं। पहली बात यह कि कैसे केंद्रीय संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए। पैरामिलिट्री डॉक्टर्स, पैरामेडिक्स, आर्मी फैसिलिटीज और डॉक्टर्स का कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरी बात यह कि सरकार के पास इस संकट से निपटने के लिए कोई प्लान है या नहीं। कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि संकट से निपटने के लिए आपका नेशनल प्लान क्या है? क्या वैक्सीनेशन ही मुख्य विकल्प है।
सुनवाई की शुरुआत में ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा- हमें लोगों की जिंदगियां बचाने की जरूरत है। जब भी हमें जरूरत महसूस होगी, हम दखल देंगे। राष्ट्रीय आपदा के समय हम मूकदर्शक नहीं बने रह सकते हैं। हम हाईकोर्ट्स की मदद की जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं। इस मामले में उन अदालतों (हाईकोर्ट) को भी अहम रोल निभाना है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 30 अप्रैल को सुनवाई करेगी।
केंद्र ने कहा- प्रधानमंत्री खुद समस्याओं पर ध्यान दे रहे हैं
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार हाई लेवल पर इस मसले पर काम कर रही है। परेशानियां दूर करने के लिए प्रधानमंत्री खुद इसे देख रहे हैं। हम हालात को बहुत सावधानी से संभाल रहे हैं।
अदालत ने पिछली सुनवाई में मांगा था 4 पॉइंट्स पर नेशनल प्लान
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में ही कहा था कि कोरोना और ऑक्सीजन जैसे मुद्दों पर छह अलग-अलग हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। इससे कंफ्यूजन पैदा हो सकता है। कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया था कि हाईकोर्ट के मामलों पर सुनवाई का मतलब केस ट्रांसफर करना नहीं है। हाईकोर्ट्स आगे बढ़ें और फैसले लें। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कोरोना के बिगड़ते हालात पर 4 पॉइंट में नेशनल प्लान मांगा था।
1. राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में ऑक्सीजन सप्लाई की कमी बनी हुई है और मरीजों की जान जा रही है।
2. पूरे देश में 1 मई से वैक्सीनेशन का तीसरा फेज शुरू हो रहा है, लेकिन राज्यों में वैक्सीन की किल्लत बनी हुई है।
3. कोरोना के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं की हर राज्य में कमी है।
4. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तालाबंदी लगाने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं होना चाहिए। ये राज्य सरकार के अधीन हो।
सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार और 5 निर्देश
ठ्ठ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर केंद्र को मौजूदा स्थिति स्पष्ट करनी होगी। कितनी ऑक्सीजन है? राज्यों की जरूरत कितनी है? केंद्र से राज्यों को ऑक्सीजन के अलॉटमेंट का आधार क्या है? राज्यों को कितनी जरूरत है, ये तेजी से जानने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई है?
ठ्ठ गंभीर होती स्वास्थ्य जरूरतों को बढ़ाया जाए। कोविड बेड्स भी बढ़ाए जाएं।
ठ्ठ वो कदम बताइए, जो रेमडेसिविर और फेवीप्रिविर जैसी जरूरी दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए उठाए गए।
ठ्ठ अभी कोविशील्ड और कोवैक्सीन जैसी दो वैक्सीन उपलब्ध हैं। सभी को वैक्सीन लगाने के लिए कितनी वैक्सीन की जरूरत होगी? इन वैक्सीन के अलग-अलग दाम तय करने के पीछे क्या तर्क और आधार हैं?
ठ्ठ 28 अप्रैल तक जवाब दें कि 18+ आबादी के वैक्सीनेशन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्या मामले हैं।